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Nepal Flood: 10 दिन पहाड़ पर फंसी कोतमा की दो बहने, लौटीं तो भाई ने बाहों में भर लिया, सबकी आंखो से छलके आंसू

Nepal Flood Manjhi sisters rescue: नेपाल में आई बाढ़ के में मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की दो बहने भी फंस गई थी। 10 दिन बाद जब वह लौटी तो भाई समेत पूरे परिवार की आंखों छलक पड़े। बहनों ने वापस आकर बाढ़ के मंजर को बयां किया।
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manjhi sisters rescue trapped nepal flood update

Nepal Flood Update: नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में फंसी कोतमा की मांझी बहनों को देख भाई के छलके आंसू (फोटो सोर्स- Patrika)

Nepal Flood Update: दस दिन तक हर फोन की घंटी पर दिल धड़कता रहा। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच फंसी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा शहर की दो बहनों पलक मांझी (24) और पल्लवी मांझी (22) से जब संपर्क टूट गया तो घर में चिंता का माहौल था। परिवार को सिर्फ उनकी सलामती की खबर का इंतजार था।

झांसी के रास्ते पहुंची ग्वालियर, ढोर माउंट के पहाड़ी क्षेत्र में फंस गई थी बहने

सोमवार को झांसी के रास्ते ग्वालियर पहुंचीं दोनों बहनों को लेने भाई विपुल मांझी स्टेशन पहुंचे। सामने बहनों को सुरक्षित देखकर भाई की आंखों में राहत थी। लंबे इंतजार के बाद भाई-बहनों का मिलन हुआ तो दोनों बहने भावुक हो गई। शाम को उन्होंने भाई की कलाई पर राखी बांधी। इसके साथ ही दस दिनों से परिवार पर डर का साया जैसे एक पल में छट गया। पलक और पल्लवी समेत नौ सदस्यीय टीम नेपाल घूमने गई थी। 26 अगस्त को जब वहां भीषण बारिश और बाढ़ ने तबाही मचाई, उस समय दोनों बहनें ढोर माउंट के पहाड़ी क्षेत्र में थी।

मोबाइल पर नेटवर्क नहीं होने के कारण बाढ़ का पता नहीं चला

पहाड़ी इलाके में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण उन्हें तत्काल आपदा की भयावहता का पता नहीं चल सका। अगले दिन जब वे पहाड़ से नीचे आई तो नेपाल में मची तबाही की तस्वीर सामने आई। शुक्रवार को पालक और पल्लवी मांझी की मां से पत्रिका ने खास बातचीत भी की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि जब दोनों बच्चियों की खबर उन तक नहीं पहुंची थी तब घर पर कैसी स्थिति थी।

भारत की सीमा में आकर लगा घर पहुंच गए

पलक मांझी ने बताया कि आपदा के दौरान मध्य प्रदेश और भारत सरकार की ओर से भी सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि इस दौरान पहली बार उन्हें अपने देश की अहमियत इतनी गहराई से महसूस हुई। उन्होंने कहा कि घर-परिवार के पास लौटने की बेचैनी इतनी पहले कभी महसूस नहीं हुई। भारत की सीमा में पहुंचते ही सबसे पहले राहत की सांस ली कि अब हम सुरक्षित हैं और अपने देश में हैं। ग्वालियर पहुंचने के बाद दोनों बहनें अपने काम पर लौट गईं। परिवार के अनुसार टिकट कन्फर्म होते ही वे कोतमा लौटेंगी। दोनों के सकुशल घर लौटने की खबर ने पिछले दस दिनों से चिंता में डूबे परिवार को आखिरकार सुकून दे दिया।

खाने-पीने की भी परेशानी

पलक और पल्लवी ने बताया कि आपदा के बाद नेपाल में कई जगह रास्ते बाधित हो गए थे। आवागमन के साधन आसानी से उपलब्ध नहीं थे। खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर भी परेशानी हुई। ऐसे हालात में सुरक्षित स्थान तक पहुंचना और वहां से भारत लौटने की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण रहा। यात्रा के दौरान उन्हें आपदा से बचकर निकले कई अन्य पर्यटक भी मिले। उन्होंने भी अपने भयावह अनुभव साझा किए। मोबाइल पर बाढ़ और तबाही के वीडियो और तस्वीरें देखने के बाद दोनों बहनों को घटना की गंभीरता का और ज्यादा एहसास हुआ। पल्लवी ने कहा कि नेपाल में बिताए वे दिन जिंदगी के सबसे डरावने अनुभवों में शामिल रहेंगे। पूरी घटना के बाद ऐसा लगा, जैसे उन्हें नया जीवन मिला हो।

हर पल बढ़ती रही बेचैनी

आपदा के दौरान मोबाइल नेटवर्क बाचित होने से परिवार का संपर्क भी दोनों बहनों से टूट गया था। घर बैठे परिजन बार-बार फोन मिलाते रहे, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। हर गुजरते घंटे के साथ चिंता बढ़ती गई। परिवार को सबसे ज्यादा इंतजार इस बात का था कि किसी तरह दोनों बहनों की सुरक्षित होने की खबर मिल जाए। नीचे आने के बाद सीमित नेटवर्क मिला तो टीम के सदस्यों ने सबसे पहले अपने-अपने परिवारों से संपर्क किया और सुरक्षित होने की जानकारी दी। यह छोटा-सा फोन कॉल परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आया। परिजनों ने बताया कि उस दौरान हर पल किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई थी।

मां कर रही फोन पर बातचीत

शुक्रवार को पत्रिका सहयोगी अजय ताम्रकार ने फोन पर बहनों की मां ललिता मांझी से बातचीत की। उन्होने बताया कि दोनों बेटियां अभी भी टीवी या सोशल मीडिया पर नेपाल की बाढ़ की खबरें देखकर शाम जाती हैं। ललिता ने बताया कि उक्त घटना के बाद लगातार फोन पर बेटियों से संपर्क में हैं। सुबह ऑफिस जाने से पहले और शाम को काम खत्म होने के बाद दोनों से फोन पर बातचीत होती है। मां का कहना है कि बेटियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलना ही उनके लिए सबसे बड़ा सुकून है। जल प्रलय के बाद बेटियों से 24 घंटे तक संपर्क ना हो पाने और बिताया हुआ एक एक पल आज भी आंख नम कर देता है।

पालक और पल्लवी की मां ने कहा कि टूर में गए सभी नौ सदस्यों के सुरक्षित घर लौटने के बाद परिवार में राहत और खुशी का माहौल है। परिजनों को उम्मीद है कि पलक और पल्लवी भी जल्द कोतमा पहुंचकर परिवार के बीच होंगी। फिलहाल, वह अपने काम के सिलसिले से ग्वालियर में हैं। ऑफिस से छुट्टी नहीं मिल पाने और टिकट कंफर्म नहीं होने के कारण दोनों बहनें अभी कोतमा नहीं लौट सकी हैं।