
अशोकनगर. राजनैतिक दल और जनप्रतिनिधि भले ही जिले में विकास के बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन रोजगार की कोई व्यवस्था न होने से जिले के 24 फीसदी लोग सिर्फ मजदूरी पर ही निर्भर हैं। वहीं मनरेगा श्रमिकों और मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना में पंजीकृत मजदूरों को शामिल करें तो जिले में मजदूरों की संख्या 32 फीसदी है।
यह खुलासा हुआ है असंगठित श्रमिक पंजीयन अभियान में आए आवेदनों से। शासन ने असंगठित श्रमिकों का पंजीयन करने के लिए अभियान चलाया तो जिलेभर में एक लाख 93 हजार 55 महिला-पुरुषों ने फॉर्म भरे। इसके अलावा जिले में 36 हजार 872 भवन श्रमिक पहले से ही पंजीकृत हैं।
इससे जिले में दोनों तरह के मजदूरों की संख्या दो लाख 29 हजार 927 हो गई है, जो कुल जनसंख्या का 24 फीसदी है। इसके अलावा श्रमिक पोर्टल पर जिले में मनरेगा श्रमिक 60 हजार 331 व मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना में 10 हजार 706 मजदूर दर्ज हैं। सभी को जोडऩे पर 9 लाख 43 हजार 559 जनसंख्या वाले जिले में मजदूरों की संख्या तीन लाख एक हजार 461 हो जाएगी।
श्रम विभाग के मुताबिक असंगठित श्रमिकों के आए आवेदनों में से अब तक 7 हजार 717 श्रमिकों का पंजीयन हो चुका है, जितने भी आवेदन आए हैं, उन सभी का पंजीयन किया जाना है। वहीं जितने मजदूरों का पंजीयन हो जाएगा, 26 अप्रैल को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उन मजदूरों को श्रमिक कार्ड वितरित करेंगे। हालांकि पंजीयन की धीमी गति के चलते सभी आवेदनों का 26 अप्रैल तक पंजीयन हो पाना असंभव है।
रोजगार उपलब्ध न होने से बढ़ रही संख्या
जानकारों की मानें तो जिले में जहां रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हैं, वहीं फसलों में करीब पांच साल से लगातार हो रहे नुकसान की वजह से कर्ज के बोझ से दबे सैकड़ों छोटे किसान अपनी जमीनों को बेचकर मजदूरी करने लगे हैं। इसी वजह से जिले में मजदूरों की संख्या बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री 26 अप्रैल को बांटेंगे श्रमिक कार्ड
जिले में विभिन्न तरह की मजदूरी करने वाले असंगठित श्रमिकों के एक लाख 93 हजार 55 आवेदन आए हैं, हालांकि आवेदन अभी और भी आ सकते हैं। इनमें से 7717 के पंजीयन हो गए हैं, सभी के पंजीयन होना है। वहीं जिले में पहले से ही 36 हजार 872 भवन श्रमिक पंजीकृत हैं।
- स्मिता अहिरवार, श्रम निरीक्षक अशोकनगर
समग्र पोर्टल पर यह पूर्व से पंजीकृत-
घरेलू कामकाजी महिला श्रमिक - 529
साइकिल, हाथठेला चालक - 216
फेरीवाला श्रमिक - 355
हम्माल-तुलावट श्रमिक - 281
बीड़ी श्रमिक - 1566
बुनकर-शिल्पी श्रमिक - 3976
Published on:
24 Apr 2018, 12:33 PM IST
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