
Ashoknagar Shamim Shah Success Story, शमीम शाह (Source-Patrika)
Ashoknagar Shamim Shah Success Story: कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसी ही कहानी है मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली निवासी 49 वर्षीय शमीम शाह की। 11वीं क्लास से लेकर छह साल तक बस स्टैंड पर ठेले पर सामान बेचने वाले शमीम आज दो निजी स्कूलों के संचालक हैं। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी जरूर लगती है, लेकिन इसके पीछे दशकों का खून-पसीना और एक भाई का अपनी बहन से किया गया वो वादा है, जिसने उनकी किस्मत बदल दी।
संघर्ष की यह दास्तान साल 1987 से शुरु हुई, जब शमीम मात्र 6वीं कक्षा में थे और उनके सिर से पिता का साया उठ गया। 7 भाई-बहनों वाले परिवार की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। मां ने बीड़ी बनाकर परिवार पाला। पिता की छोड़ी गई जमा-पूंजी दोनों बड़ी बहनों की शादी में खर्च हो गई, फिर मां की बीमारी के चलते घर के गहने व गाय-भैंस तक बेचने पड़े। 10 साल तक परिवार कर्ज में डूबा रहा। आलम यह था कि 10वीं कक्षा में शमीम पूरी किताबें तक नहीं खरीद सके, केवल गणित व अंग्रेजी की किताब से ही पढ़ाई की। परिवार को सहारा देने 11वीं कक्षा से ही उन्होंने बस स्टैंड पर ठेला लगाना शुरु कर दिया।
छह साल ठेले पर सामान बेचने के बाद साल 1999 में शमीम ने आटा चक्की खोली, जिसमें छोटे भाई ने भी हाथ बंटाया। जुलाई 2001 में उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में 500 रुपये महीने पर शिक्षक की नौकरी शुरु की। उनकी मेहनत देख स्कूल प्रबंधन ने बड़ी जिम्मेदारी दी और वेतन दो हजार रुपए कर दिया। अपनी आमदनी बढ़ाने शमीम ने 4 साल तक शाम के समय घर-घर जाकर ट्यूशन भी पढ़ाई।
इसी संघर्ष के दौर में शमीम ने अपनी बड़ी बहन के सामने एक संकल्प लिया था कि मैं परिवार को गरीबी से बाहर निकालूंगा और एक दिन बड़ा आदमी बनकर दिखाऊंगा। अपनी इस प्रतिज्ञा को उन्होंने सच कर दिखाया। साल 2006 में उन्होंने बहादुरपुर में अपना खुद का स्कूल खोला और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने मुंगावली में एक और स्कूल की स्थापना की। आज उनके पास एक बेटा, एक बेटी और जिंदगी की हर सुख-सुविधा मौजूद है। अनेक अड़चनों के बावजूद उनका सफलता का सफर जारी है। साथ ही अब वह 45 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
जिंदगी के कड़े थपेड़े खाने वाले शमीम शाह आज समाज को बड़ी मिसाल हैं। उनका कहना है कि गरीबी से बढ़कर दुनिया में कोई दुख नहीं। गरीब पैदा होना कोई बुराई नहीं, लेकिन गरीब मर जाना बहुत बुरी बात है। अशिक्षा ही गरीबी की जननी है, इसलिए खुद भी पढ़ें और अपने बच्चों को भी खूब पढ़ाएं।
Updated on:
1 Nov 2026, 4:14 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 4:09 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.