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पाकिस्तान में धूमधाम से मनाया जाएगा बसंत, सरकार ने हटाए प्रतिबंध

2005 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस त्यौहार पर प्रतिबंध लगा दिया था
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 20 Dec 2018, 11:54 AM IST

Pakistan Basant festival

पाकिस्तान में धूमधाम से मनाया जाएगा बसंत, सरकार ने हटाए प्रतिबंध

लाहौर। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में इस बार धूमधाम से बंसत मनाया जाएगा। प्रांत की सरकार ने बसंत मनाए जाने पर लगे प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार अगले साल फरवरी के दूसरे सप्ताह में बसंत मनाएगी। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने बंसत का त्यौहार मनाने के लिए औपचारिक अनुमति भी दे दी है। बता दें कि 2005 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस त्यौहार पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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पाकिस्तान में धूमधाम से मनाया जाएगा बसंत

पंजाब की सरकार ने लाहौर के इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक त्यौहार को पुनर्जीवित करने का फैसला किया है। पंजाब के सूचना एवं संस्कृति मंत्री फय्याजुल हसन चोहन ने पाकिस्तानी अखबार द न्यूज़ इंटरनेशनल से बातचीत में कहा कि 'हम फरवरी के दूसरे सप्ताह में बसंत मनाएंगे।' बता दें कि त्यौहार के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के कारण कई नागरिकों ने अपने जीवन को खोया जिसके बाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इस त्योहार पर प्रतिबंध लगाया था। बता दें कि इस दौरान की जाने वाली पतंगबाजी के चलते कई नागरिकों की मौत हो गई थी। इस साल त्यौहार पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती से निगरानी की जाएगी। पंजाब प्रांत की सरकार ने मंगलवार को बसंतोत्सव के आयोजन पर पिछले 12 सालों से लगा प्रतिबंध हटा लिया है ।

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पाकिस्तान ने कानून में किया बदलाव

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पांजब के मंत्री कोहन ने कहा कि एक समिति गठित की जाएगी जिसमें पंजाब के कानून मंत्री, प्रांतीय मुख्य सचिव और दूसरे प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति इस बात पर चर्चा करेगी कि कैसे इस त्योहार के दौरान नकारात्मक पहलुओं से बचा जा सकता है। मंत्री ने कहा कि यह समिति एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी। बता दें कि 2007 में जब इस त्योहार पर पाबंदी लगा दी गई थी तब कहा गया था कि कट्टरपंथी धार्मिक और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी समूहों के दबाव में इस त्यौहार पर पाबंदी लगाई गई थी। कट्टरपंथी धार्मिक समुदाय का मानना है कि यह त्योहार मूलत: हिंदुओं और सिखों का है और यह इस्लामी मान्यताओं के खिलाफ है।

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