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हरकतों से नहीं बाज आ रहा चीन, अब ब्रह्मपुत्र का पानी रोकने के लिए बनाया या प्लान

इस सुरंग के माध्यम से चीन ब्रह्मपुत्र का पानी तिब्बत से जिनजियांग की तरफ मोड़ने की जुगत में है।
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Mohit sharma

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Updated: 30 Oct 2017, 6:50 PM IST

Brahmaputra

नई दिल्ली। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। अभी डोकलाम विवाद शांत नहीं पड़ा था कि चीन ने नया पैंतरा चलते हुए ब्रह्मपुत्र का पानी रोकने की योजना तैयार कर डाली। इसके लिए चीन 1000 किमी लंबी सुरंग का निर्माण कर रहा है। इस सुरंग के माध्यम से चीन ब्रह्मपुत्र का पानी तिब्बत से जिनजियांग की तरफ मोड़ने की जुगत में है। यदि चीन की यह योजना सफल होती है, तो इससे भारत और बांग्लादेश खासी परेशानी में पड़ जाएंगे।

चीन की प्राथमिकता में है प्लान

दरअसल, ब्रह्मपुत्र के बहाव को रोकने के लिए चीन लंबे समय से योजना बना रहा है। लेकिन उसके मंसूबे कामयाब नहीं हो पा रहे थे। टनल निर्माण की ड्राफ्टिंग समिति में शामिल रहे वांग वी के अनुसार इस प्रोजेक्ट में एक किलोमीटर पर लगभग एक बिलियन युआन का खर्च आएगा। इस हिसाब से 100 किमी लंबे इस टनल पर टोटल खर्च 1 ट्रिलियन युआन के आसपास आएगा। हालांकि जानकारी सामने आई है कि इस प्रोजेक्ट को अभी पर्यावरणविदों की ओर से क्लियरंस नहीं दिया गया है और अभी चीनी सरकार इससे होने वाले नफा—नुकसान के आकलन में जुटी है। एक चीनी शोधकर्ता के अनुसार यह प्रोजेक्ट चीन की प्राथमिकता है और इसको वह एक दिन जरूर अंजाम तक पहुंचाएगा।

भारत पर यह पड़ेगा असर

चीन के इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा प्रभाव भारत पर पड़ेगा। यही कारण है कि 2010 में भी तिब्बत के जैंग्मू में बनाए गए बांध पर भी भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। हालांकि जैंग्मू बांध के बाद चीन इसके अलावा तीन और अन्य बांधों को भी अनुमति दे चुका है। जानकारों के मुताबिक जैग्मू और अन्य तीन बांधों की अपेक्षा ब्रहृमपुत्र पर बनने वाला बांध भारत के लिए अधिक मुसीबतों खड़ा कर सकता है। हालांकि इससे पड़ोसी देश बांग्लादेश को भी बड़ा खामियाजा भुगताना पड़ेगा। आपको बता दें कि डोकलाम विवाद के दौरान जिस समय भारत के गुजरात व असम समेत कई राज्यों में बाढ़ आई हुई थी, तब भी चीन ने ब्रहृमपुत्र पानी का लेखाजोखा देने से साफ इनकार कर दिया था।