30 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

साउथ चाइना सी में चीन ने तैनात की मिसाइलें, फिलीपीन्स में विरोध प्रदर्शन

विवादित द्वीपों पर चीन की गतिविधियों के खिलाफ मनीला में प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों ने चीनी दूतावास के सामने जमकर नारेबाजी की।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Mangala Prasad Yadav

•

Updated: 18 May 2018, 8:44 PM IST

protest

साउथ चाइना सी में चीन ने तैनात की मिसाइलें, फिलीपीन्स में विरोध प्रदर्शन

मनीलाः दक्षिण चीन सागर में विवादित द्वीपों पर चीन की गतिविधियों का विरोध करने के लिए शुक्रवार को फिलीपीन्स के मकाति जिले में चीनी वाणिज्य दूतावास पर प्रदर्शनकारियों का एक समूह एकत्र हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पमलकाया समूह के एक दर्जन लोग ने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। वे हाथों में तख्तियां लिए थे और उन्होंने चीन द्वारा कथित तौर पर स्पार्टले द्वीप पर मिसाइल लगाने की निंदा की। प्रदर्शन कर रहे एक व्यक्ति की तख्ती पर मिसाइल का चित्र बना हुआ था और उस पर 'फिलीपीन्स जल क्षेत्र से चीन के बाहर जाने' का संदेश लिखा था, जबकि दूसरी तख्तियों पर 'पश्चिमी फिलीपीन समुद्र क्षेत्र से चीन के बाहर जाने' व 'संप्रभुता की रक्षा' की बात लिखी थी। पमलकाया की एक समाचार विज्ञप्ति में 'स्पार्टले द्वीप समूह में फिलीपींस से जब्त किए गए सात कृत्रिम द्वीपों में से तीन पर पर चीन द्वारा क्रूज और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल लगाने की' आलोचना की गई है।

चीन-फिलीपीन्स के बीच है विवाद
दरअसल दक्षिण चीन सागर में फिलीपीन्स और चीन के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। चीन इस इलाके को अपना बताता है तो फिलीपीन्स इस इलाके पर अपना हक जताता है। फिलीपीन्स का दावा है कि स्पार्टले द्वीप समूह में चीन अपने मिसाइल तैनात कर दी है। फिलीपीन्स ने इसे अपने संप्रभुता पर आक्रमण बताया है। उधर चीन का कहना है कि जहां पर उसनी मिसाइल तैनात है वह उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। भारत समेत ज्यादातर देश दुनिया के प्रमुख जल व्यापार मार्गो में शामिल इस जल क्षेत्र पर चीनी दावे के खिलाफ हैं। इससे पहले नवंबर 2017 में दक्षिण सागर में फिलीपीन्स और चीन के बीच गतिरोध सामने आया था। यहां पर फिलीपीन्स की तरफ से सैंड बार (बालू की दीवार) बनाई जा रही थी जिसे चीन ने रोक दिया था।