
Special Story: इस गांव में पीपल के पेड़ लगाने की अनूठी है प्रथा, कोरोना संकटकाल में पीपल बने संजीवनी, पूरे गांव में 245 पेड़
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
औरैया. मानव जीवन के लिए पीपल कितना अहम वृक्ष है, औरैया जनपद के बेला क्षेत्र के मल्हौसी के ग्रामीणों से अच्छा कौन समझ सकता है। 4 हजार की आबादी वाले इस गांव में पीपल के 245 पेड़ लगे हैं। यहां के लोग इन्हें जीवन का कारक मानते हैं। ग्रामीण प्रतिदिन इन्हीं पीपल के पेड़ो के नीचे सुबह योग करते हैं और दिन की चर्चाएं भी इन्हीं पेड़ो के नीचे बैठकर करते हैं। गांव की विशेषता है कि जब घर के कोई खुशी का आगमन होता है तो पीपल का पौधरोपण किया जाता है। इसी मान्यता के चलते आज इस गांव में लोग शुद्ध ऑक्सीजन लेते हैं। 400 हेक्टेयर में बड़े इस गांव के ग्रामीणों का पीपल के नीचे मिलने वाली हवा पर बहुत विश्वास है।
ग्रामीण कहते हैं कि यहां जल्दी कोई बीमार नहीं होता है। किसी कारणवश बीमार होते हैं तो मामूली इलाज से ठीक हो जाते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि बुजुर्गो ने जो हमें पीपल के पेड़ उपहार स्वरूप देते हैं वो हमारे लिए वरदान हैं। कोरोना जैसे संकटकाल में यही पेड़ हमारे लिए जीवन रक्षक बने हैं। गांव की ग्राम प्रधान उर्मिला देवी ने बताया कि गांव में पीपल का पेड़ लगाने की परंपरा बुजुर्गों ने शुरू की थी। हम लोग इसे बरकरार रखेंगे। बुजुर्गों ने नई पीढ़ी के लिए वरदान के रूप में पेड़ दिए हैं। अब हम भी आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक पीपल के पेड़ लगाएंगे।
Published on:
05 Jun 2021 07:56 pm
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