
धरने पर बैठी महिलाएं
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में पुलिस पर हमले के बाद की गयी कार्रवाई का मामला तूल पकड़ने व राजनीतिक दलों द्वारा इस पर की जा रही सियासत को देेखतेे हुए पुलिस और जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। आजमगढ़ दलित उत्पीड़न कांड (Azamgarh Dalit Opression) में पुलिस अधीक्षक ने जहां थानेदार को लाइन हाजिर कर मामले को शांत करने की कोशिश की वहीं जिला प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रेटियल जांच (megestratial probe) का आदेश दे दिया है। एसडीएम लालगंज को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
बता दें कि रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव में 29 जून को छेड़खानी को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई थी। जिसकी सूचना पर पहुंचे दो पुलिस कर्मियों पर ही हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने गांव के प्रधान पति मुन्ना पासवान समेत दर्जन भर नाम व कुछ अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। रातोरात पुलिस ने जेसीबी लगा कर प्रधान पति के अलावा उसके आधा दर्जन समर्थकों के मकान का कुछ हिस्सा गिरवा दिया था। हालांकि पुलिस ऐसी किसी कार्रवाई से इंकार कर रही है।
घटना के बाद गांव की महिलाओं ने धरना प्रदर्शन शुरू किया तो कांग्रेस पार्टी ने उसे अपना समर्थन दे दिया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी व बसपा मुखिया मायावती द्वारा इस प्रकरण में ट्वीट करने क साथ ही प्रतिनिधिमंडल गांव में भेजा गया। सपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी गांव में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। 19 जुलाई को यहां भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर भी पहुंच रहे है।
मामले को राजनीतिक रंग लेता देख अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार ने मामले की मजिस्ट्रेटियल जांच का आदेश दिया है। साथ ही एसडीएम लालगंज को जांच अधिकारी नामित कर दिया है। दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने रौनापार थानाध्यक्ष तारकेश्वर राय को लाइन हाजिर कर दिया है। कार्रवाई के बाद गांव के लोगों का गुस्सा थोड़ा कम जरूर हुआ है लेेकिन अभी वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
BY Ran vijay singh
Published on:
08 Jul 2021 09:39 am
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