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विश्व पर्यावरण दिवस : देखरेख के अभाव में चढ़ रही हजारों पेड़ों की बलि

सडक़ चौड़ीकरण के नाम पर बीते दो सालों के दौरान 2 हजार से अधिक हरे-भरे वृक्षों की बली चढ़ाई गई है।
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बलोदा बाज़ार

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Deepak Sahu

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Updated: 5 Jun 2018, 5:51 PM IST

Environment

जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के आसपास बीते दो सालों के दौरान सडक़ चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के नाम पर 2 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ काटे गए हैं। इससे क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची है।

बलौदाबाजार. जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के आसपास बीते दो सालों के दौरान सडक़ चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के नाम पर 2 हजार से अधिक हरे-भरे पेड़ काटे गए हैं। इससे क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंची है। नियमानुसार एक पेड़ काटने के पूर्व उसके स्थान पर पौधों का रोपण किया जाना चाहिए, जो आज तक नहीं किया गया है। बलौदाबाजार क्षेत्र प्रदेश का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक जिला है। जिले में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई उद्योगों के होने तथा प्रदूषण को देखते हुए इस बारिश में वृहद स्तर पर अभियान चलाकर पौधारोपण किया जाना बेहद आवश्यक है।

विदित हो कि बीते दो सालों के दौरान बलौदाबाजार के मुख्य मार्ग सहित रायपुर रोड, कसडोल रोड, भाटापारा रोड का चौड़ीकरण किया गया है। चौड़ीकरण के बाद एक ओर जहां लोगों को चौड़ी सडक़ों का लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर चौड़ीकरण के नाम पर मनमाने ढंग से 20-25 वर्ष पुराने हरे-भरे वृक्षों की कटाई की गई है। सडक़ किनारे के हरे-भरे वृक्षों को काटे जाने की वजह से इस वर्ष की ग्रीष्म ऋ तु में लोगों को सडक़ किनारे के वृक्षों का महत्व पता चला है। नगर के मुख्य मार्ग समेत बलौदाबाजार से तीन किमी के चारों ओर के किसी मार्ग पर भी सडक़ किनारे बड़ा वृक्ष नहीं बचा है। इससे भीषण गर्मी के दिनों में लोगों को पेड़ की छांव तक नसीब नहीं हो रही है।

जानकारी के अनुसार पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए एक ओर जहां बीते दस सालों में रोपे गए हजारों पौधों में से 5 फीसदी पौधे भी जीवित नहीं बचे हैं। वहीं दूसरी ओर सडक़ चौड़ीकरण के नाम पर बीते दो सालों के दौरान 2 हजार से अधिक हरे-भरे वृक्षों की बली चढ़ाई गई है। नियमानुसार किसी भी वृक्ष को काटे जाने के पूर्व काटने वाले वृक्षों की दोगुनी संख्या के पौधों का पहले रोपण किया जाना चाहिए। लेकिन बीते दो सालों में सडक़ चौड़ीकरण के नाम पर काटे गए वृक्षों के स्थान पर आज तक एक भी पौधे नहीं लगाए गए हैं। नौतपा के बाद आगामी 15 जून से मानसून आने के साथ ही बरसात का सीजन प्रारंभ हो जाएगा। बीते वर्षों में काटे गए पौधों के स्थान पर हजारों पौधों का रोपण और उन्हें आगामी वर्षों तक के लिए सहेजकर रखने के लिए जिला प्रशासन के साथ ही साथ स्थानीय नगर पालिका को भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना बेहद आवश्यक है।

बीते कुछ वर्षों में पौधरोपण के नाम पर नगर के डीके महाविद्यालय, शासकीय कन्या महाविद्यालय, हाईस्कूल मैदान, बेसिक शाला मैदान, मनोहर दास वैष्णव शाला मैदान, जिलाधीश कार्यालय परिसर, डमरू मार्ग, कुकुरदी, छुईहा जलाशय किनारे, लवन ब्रांच केनाल किनारे, छुईहा जलाशय, कुकुरदी जलाशय, नगर के परसाभदेर मार्ग किनारे और अन्य शासकीय जमीनों पर वृहद पैमाने पर पौधरोपण किया गया था, लेकिन वर्तमान में इनमें से अधिकांश स्थान पर एक भी पौधा नजर नहीं आता है। हाईस्कूल के जिस मैदान में हजारों पौधे लगाए गए थे।

वहां आज पूरा मैदान सूखा पड़ा हुआ है। प्रशासन ने पौधों को लगाए जाने के बाद कभी भी उनकी सुरक्षा के बारे में ध्यान नहीं दिया था। पौधों की सुरक्षा में ट्री गार्ड, सिंचाई आदि की भी व्यवस्था नहीं की गई। 90 फीसदी पौधरोपण के सप्ताह भर बाद ही नष्ट हो गए।

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