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सीएम साहब! आप भी देखिए, सरकारी खजाने का आखिर यहां कैसे किया जा रहा है दुरुपयोग

मामला उजागर होने के बाद 4 दिन बंद करा दिया गया था काम, अब सरपंच द्वारा कुछ पंचों को अपने पक्ष में लेकर कही जा रही ये बात
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बलरामपुर

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Ram Prawesh Vishwakarma

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Updated: 11 Apr 2018, 3:52 PM IST

Checkdam

Checkdam construction

राजपुर. शासन से मिले रुपयों का दुरुपयोग किस तरह किया जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर विकासखंड स्थित धंधापुर में बनने वाला चेकडेम सह पुलिया है। इसका निर्माण 19 लाख की लागत से किया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि जिस जगह पर इसका निर्माण किया जा रहा है वहां उसका कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है।

न तो वहां सड़क है और न ही पानी ठहरने का स्थल। ऐसे में यह सरकारी राशि का दुरुपयोग ही है। मामला उजागर होने पर 4 दिन तो काम रोक दिया गया। अब सरपंच और सचिव द्वारा एक नया हथकंडा अपनाकर काम फिर से शुरू कर दिया है।

इसके लिए सरपंच-सचिव ने गांव के अपने पक्ष के कुछ पंचों और ग्रामीणों का एक पंचनामा तैयार करवाया है कि काम सही जगह पर हो रहा है। जबकि निर्माण स्थल का मुआयना कर हकीकत की पड़ताल अधिकारियों द्वारा की जा सकती है लेकिन सभी की मिलीभगत से इस काम में शासकीय राशि की बर्बादी की जा रही है।


सोमवार को सरपंच-सचिव ने गांव के कुछ पंचों और गांव के आठ-दस लोगों को बुलाया और उनसे एक पंचनामा में हस्ताक्षकर करवा लिया गया कि जहां स्टाप डेम सह पुलिया बन रहा है वह सही जगह है। जबकि जहां पर काम हो रहा है वह गांव के दूरस्थ क्षेत्र में जंगल किनारे है।

वहां से सिर्फ मवेशी ही गुजरते हैं और आने-जाने के लिए सड़क तक नहीं है। यह मामला उजागर होने के बाद दो चार दिन काम बंद रहा लेकिन इसके बाद पंचायत के कुछ पदाधिकारियों और सरपंच-सचिव के बीच राशि के बंदरबाट के लिए नया हथकंडा अपना लिया गया।


मजदूरों की जगह जेसीबी से काम
जानकारी के मुताबिक 19 लाख की लागत से बनने वाले इस स्टाप डेम के लिए जंगल में एक माह पहले जेसीबी से नींव की खुदाई की गई, लेकिन मनरेगा के तहत होने वाले इस काम के लिए मजदूरों का उपयोग करना था। इस खुलासे के बाद अधिकारियों ने जांच की जहमत तक नहीं उठाई।

वहीं इस निर्माण के लिए एक साल पहले ही दो लाख रुपए का आहरण कर लिया गया है। ऐसे में इस निर्माण के निरस्त होने पर सरपंच-सचिव को रिकवरी की चिंता सता रही है तो कमीशन लेकर काम की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों और इंजीनियरों को भी उच्चस्तर पर जांच होने पर कार्रवाई का डर है।