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योग का महत्व समझाया

तत्त्वों की व्याख्या करते हुए उन्होंने त्याग प्रत्याख्यान में करण, योग के महत्व को समझाया।
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योग का महत्व समझाया

बेंगलूरु. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महिला मंडल यशवंतपुर की ओर से मुनि रणजीत कुमार एवं मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में तत्त्वबोध कार्यशाला आयोजित की गई। मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि प्रारंभ में बहनों को नव तत्त्वों एवं छह द्रव्यों के नाम स्मरण होने चाहिए। तत्त्वों की व्याख्या करते हुए उन्होंने त्याग प्रत्याख्यान में करण, योग के महत्व को समझाया। मुनि रमेश कुमार ने बहनों को दस प्रत्याख्यान, पंचरंगी आदि तपस्यों में जागरूक होने की प्रेरणा दी। मंत्री मीनाक्षी दक ने कृतज्ञता ज्ञापित की। रेखा पितलिया, कंचन भंसाली, लता भंसाली, संगीत बरडिय़ा, राजल बाबेल आदि उपस्थित रहीं।


धर्म का आश्रय लेकर बच सकते हैं दुख से
बेंगलूरु. वीवीपुरम में आचार्य जिनसुंदर सूरीश्वर ने कहा कि पूर्वाचार्य ने वैराग्य शतक में कहा है कि जमीन और आसमान के बीच नाना प्रकार के दुख भोगने वाले प्राणी यदि धर्म का आश्रय लें, तो वे दुख से बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि सदा धर्म का आश्रय लेना चाहिए। संसार में जो व्यक्ति धर्म का पालन करता है वह दुख से बच जाता है।


अपेक्षाओं की उपेक्षा पर आता है क्रोध
बेंगलूरु. चामराजपेट में साध्वी अर्पिता ने कहा कि 18 प्रकार के पापों में पहले पांच प्रकार के पाप महाव्रतों को भंग करने वाले हैं। अगले चार प्रकार के पाप क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी चार कषाय हंै। उन्होंने कहा कि मनुष्य को क्रोध तब आता है, जब उसकी अपेक्षाओं की उपेक्षा होती है अथवा जब उसकी इच्छाओं की पूर्ति नहीं होती। उसके अहं को चोट पहुंचती है। साध्वी वीना ने भी भाव रखे। साध्वी वीरकांता ने मांगलिक प्रदान किया। संचालन माणकचंद रुणवाल ने किया। एकासन तप अनुष्ठान में 50 श्राविकाओं ने
भाग लिया।


श्रद्धा के साथ जियो
बेंगलूरु. नाकोड़ा पाŸवनाथ जैन मंदिर राजाजीनगर के तत्वावधान में लुणिया भवन में संत अभिनंदन चंद्र सागर ने कहा कि उत्तराध्यन सूत्र में भगवान महावीर ने बताया कि श्रद्धा से जियो, अश्रद्धा और अंधकार से नहीं। उन्होंने कहा कि श्रद्धा तीसरे नेत्र जैसी होती है। श्रद्धा के माध्यम से अपने आत्मा को कर्म से पर करके वह भगवान बन सकता है।