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एक सरकारी स्कूल, एक छात्रा, दो शिक्षक

कर्नाटक में कन्‍नड़ माध्‍यम के सरकारी स्‍कूलों की हालत खराब
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बैंगलोर

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Sanjay Kumar Kareer

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Updated: 29 Sep 2018, 6:28 PM IST

education department

education department

बेंगलूरु. विधानसभाध्यक्ष के. आर. रमेशकुमार के विधानसभा क्षेत्र में स्थित एक सरकारी कन्नड़ स्कूल में अजीब हालत है। कोलार जिले के श्रीनिवासपुर विधानसभा क्षेत्र के ओबेनहल्ली में स्थित इस सरकारी प्राथमिक स्कूल में केवल एक छात्रा तथा दो शिक्षक हैं।

हाल में राजाजी नगर क्षेत्र के विधायक एस.सुरेश कुमार ने इस स्कूल का दौरा किया तो यह बात उजागर हुई। सुरेश कुमार ने विधानसभाध्यक्ष को पत्र लिखकर स्कूल की हालत सुधारने की मांग की है।

सुरेश कुमार के मुताबिक जब वे स्कूल पहुंचे तब इस स्कूल में केवल एक छात्रा तथा एक शिक्षिका थी। जब उन्होंने शिक्षिका से संवाद किया तब शिक्षिका ने बताया की यह एक मात्र छात्रा भी उस स्कूल की नहीं है। इस स्कूल को विलीनीकरण से बचाने के लिए स्कूल के दो शिक्षकों ने छात्रा को पड़ोसी गांव के स्कूल से इस स्कूल में भर्ती किया है।

एक छात्रा को दो शिक्षक पढ़ा रहे हैं। यह स्कूल देहातों के सरकारी कन्नड़ माध्यम स्कूल की हालत बयान कर रहा है। जिले के कई स्कूल विद्यार्थियों की पर्याप्त संख्या नहीं होने से पड़ोसी गांवों के स्कूलों में विलय किया जा रहा है।

दो वर्ष पुराने प्रश्न पूछे जाने से नर्सिंग विद्यार्थी खफा

बेंगलूरु. राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयू एचएस) परीक्षा को लेकर फिर विवादों में है। इस बार प्रश्न पत्र को लेकर। हालांकि नियमों का हवाला देते हुए आरजीयूएचएस ने इस विवाद को निराधार बताया है। एमएससी (नर्सिंग) के प्रबंधन विषय के पर्चा के बाद यह विवाद सामने आया। परीक्षार्थियों ने बताया कि इस बार पूछे गए कुल आठ प्रश्नों के समूह में से छह समूह वर्ष 2016 के प्रश्न पत्र से पूर्ण रूप से मेल खाते हैं।

परीक्षार्थियों ने फिर से परीक्षा कराने की मांग की है। उनके अनुसार जिन परीक्षार्थियों ने पुराने प्रश्न पत्र से भी तैयारी की है वे ज्यादा फायदे में हैं। हालांकि आरजीयूएचएस के अधिकारियों का कहना है कि प्रश्न पत्र सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। जहां तक प्रश्न पत्र के मेल खाने का सवाल है तो ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी भी विवि को ऐसे प्रश्न पत्र तैयार करने से रोके जो पुराने प्रश्न पत्रों से मेल खाते हों।इसलिए फिर से परीक्षा कराने का सवाल नहीं उठता है।

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