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ज्ञानशाला पूरे बेंगलूरु का गौरव बढ़ाती है

यशवंतपुर निष्ठावान क्षेत्र है। यहां की ज्ञानशाला पूरे बेंगलूरु का गौरव बढ़ाती है। प्रशिक्षिकाएं भी निष्ठा से अध्ययन कराती हैं।
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 18 Nov 2018, 5:25 PM IST

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ज्ञानशाला पूरे बेंगलूरु का गौरव बढ़ाती है

बेंगलूरु. तेरापंथ सभा यशवंतपुर के तत्वावधान में मुनि रणजीत कुमार एवं मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में बेंगलूरु उपनगरीय यशवंतपुर ज्ञानशाला के वार्षिकोत्सव का आयोजन तेरापंथ भवन में शुक्रवार रात्रि हुआ।

मुनि रणजीत कुमार ने कहा ज्ञानशाला से बच्चों में धार्मिक संस्कार दिए जाते हैं। यशवंतपुर निष्ठावान क्षेत्र है। यहां की ज्ञानशाला पूरे बेंगलूरु का गौरव बढ़ाती है। प्रशिक्षिकाएं भी निष्ठा से अध्ययन कराती हैं।

मुनि रमेश कुमार ने कहा- ज्ञानशाला में बालकों को अच्छे विचार और संस्कार दिए जाते हैं। वर्तमान में शिक्षा के साथ संस्कार निर्माण बहुत जरूरी है। ज्ञानशाला के माध्यम से बालकों को संस्कारी बनाया जाता है।

ज्ञानशाला द्वारा दिव्य गुणों का विकास होता है। वहीं कुसंस्कारों का निष्कासन। इससे पूर्व ज्ञानार्थियों ने अर्हम की वंदना से मंगलाचरण किया। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष प्रकाश बाबेल ने अतिथियों का स्वागत किया।

ज्ञानशाला के आंचलिक संयोजक माणकचन्द संचेती ने पूरे भारत में चल रही ज्ञानशालाओं की जानकारी दी। बेंगलूरु शहर में 35 जगह ज्ञानशाला का संचालन हो रहा है। लगभग 185 प्रशिक्षिकाएं सेवाएं दे रही हैं।

ज्ञानार्थियों ने अपने-अपने अध्ययन के परिसंवाद के माध्यम से जानकारी दी। बच्चों ने नाटिका के माध्यम से हमारी वंडरफुल ज्ञानशाला एवं नौ तत्वों का परिचय देते हुए मनमोहक प्रस्तुति दीं।

तेरापंथ कन्या मंडल ने चार कषाय जीवन विकास में कैसे घातक होते हैं, इसकी प्रस्तुति दी। तेरापंथ किशोर मंडल ने अभिभावकों के द्वारा सम्यक संस्कारों के अभाव में क्या होता है उसकी प्रस्तुति दी।

तेरापंथ महिला मंडल यशवंतपुर की अध्यक्ष अरुणा महनोत। ज्ञानशाला संयोजिका मीनाक्षी दक ने यशवंतपुर की ज्ञानशाला की जानकारी दी। उत्कर्ष थीम को लेकर ज्ञानशाला में संस्कारों की उन्नति, भावों की उन्नति और ज्ञान की उन्नति की ओर ज्ञानार्थी अग्रसर है।

गुरुदेव के पदार्पण के समय तक हम उस शिखर की ओर गतिमान हो सके, ऐसे विचारों से अभिभावकों को भी जागृत करना है।

मुख्य प्रशिक्षिका पदमा सुराणा ने ज्ञानशाला की वार्षिक रिपोर्ट पेश की। लता गांधी ने विचार व्यक्त किए।

तेरापंथ सभा के मंत्री गौतम मूथा ने विचार व्यक्त किए। रूपा गादिया, संगीता बाबेल, आशा पितलिया, टीना पितलिया ने कुशलता पूर्वक संचालन किया।

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