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केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश…

देसी-विदेशी पर्यटकों ने प्रस्तुतियों को खूब सराहा
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 13 Oct 2018, 4:58 PM IST

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केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश...

मैसूरु. शहर के छोटा घण्टा घर प्रांगण में शुक्रवार शाम को दस दिवसीय मैसूरु दशहरा महोत्सव के उपलक्ष्य में राजस्थान के जोधपुर, पाली, जैसलमेर के लंगा गायक कलाकार हीरानाथ कालबेलिया एवं पार्टी द्वारा पारम्परिक वेशभूषा में केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश..., काल्यो कुद पड़ीयो मेला में साइकिल पंचर कर लायो...,मोर बोले रे ओ मल जी आबू रे पाड़ो में ओ मलसा मोर बोले सा....आदि राजस्थानी लोकगीतों पर प्रस्तुतियां दीं। देसी-विदेशी पर्यटकों ने प्रस्तुतियों को खूब सराहा। महिला कलाकारों ने घूमर व विभिन्न प्रकार के नृत्य प्रस्तुत किए। इस मौके पर सरकार के प्रतिनिधि व आयोजक वाईएसहारागी, डॉ वीसी विजय कुमार, केजी नारायण शेट्टी, पृथ्वी सिंह चांदावत, कृपाल सिंह महेचा, नेमाराम पटेल आदि उपस्थित रहे।

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दीक्षार्थी बंधुओं का बहुमान

संयम तेरी सांस हो, सेवा तेरी तड़पन हो, गुरु आज्ञापालन प्राण हो, ज्ञान-ध्यान-स्वाध्याय तेरी मूल पुंजी हो, जैन धर्म से प्राणी मात्र का कल्याण हो, यही तेरा सपना हो, यही तेरा सपना हो

बेंगलूरु. आचार्य जिनसुंदर सूरीश्वर की निश्रा एवं जैनसंघ त्यागराज नगर, बेंगलूरु के तत्वावधान में मंड्या निवासी मुमुक्षु बंधु यशपाल कुमार एवं दावणगेरे निवासी तरुण कुमार की भव्य शोभायात्रा निकली। साथ ही अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। सर्वप्रथम आचार्य प्रवचन के हुए। उसके पश्चात संघ के वरिष्ठ सदस्य प्रकाश मेहता ने बताया कि संयम पथ पर चलना अवश्य ही दुश्कर कार्य हैं। परन्तु बाधाएं सहारा बनती हैं। उनसे हमारी राहें अच्छे की ओर मुड़ जाती हैं।

दीक्षार्थी बंधुओं को शुभकामनाएं देते हुए मेहता ने 'संयम तेरी सांस हो, सेवा तेरी तड़पन हो, गुरु आज्ञापालन प्राण हो, ज्ञान-ध्यान-स्वाध्याय तेरी मूल पुंजी हो, जैन धर्म से प्राणी मात्र का कल्याण हो, यही तेरा सपना हो, यही तेरा सपना हो...गीतिका पेश की। तत्पश्चात दोनों ही मुमुक्षुओं ने उनको संयम जीवन अंगीकार करने कि प्रेरणा कैसे प्राप्त हुई? इस बाबत अपने विचार वहां उपस्थित श्रीसंघ के साथ साझा किए। अंत में संघ के ट्रस्टियों द्वारा दीक्षार्थियों का माल्यार्पण, श्रीफल से बहुमान किया गया।

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