
जिन शासन में आचार्य का सर्वाधिक महत्व
मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर के सान्निध्य में आचार्य विजय रामचंद्र सूरीश्वर की 27वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में तीन दिवसीय देव गुरु महोत्सव भक्ति महोत्सव का आयोजन किया गया। आचार्य ने कहा, जिन शासन में आचार्य महाराज का सर्वाधिक महत्व है। परमात्मा के विरह में शासन की धुरी को आचार्य महाराज ही संभालते हैं।
नाम से आचार्य तो खूब होते हैं। विद्यापीठ के प्राध्यापक को भी प्राचार्य कहते हैं परंतु वे शासन को नहीं संभालते। स्थापना से आचार्य रूप आचार्य की प्रतिमा भी शासन का अनुशासन नहीं कर सकती है। आचार्य होते हुए भी जो आचार्य के गुणों से रहित है, वे शासन की उन्नति नहीं कर सकते हैं।
बड़ों के प्रति आदर का भाव रखें
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि जो व्यक्ति गुरु की, माता पिता की विनम्रता के साथ उनकी आज्ञा का पालन करता है, उसे धर्म का लाभ और तप का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि जो माता पिता को तीर्थ यात्रा करवाता है और साधु संतों के दर्शन करवाता है उसे पुण्यफल की प्राप्ति होती है। क्योंकि माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद हमारे जीवन के हर संकट को हरता है। बड़ों के प्रति आदर का भाव रखें।
कमजोर व्यक्ति पर ही आता क्रोध
बेंगलूरु. चामराजपेट में साध्वी वीना ने कहा कि श्रावक के आचार कर्तव्य के ऊपर चर्चा चल रही है कि श्रावक को कैसा रहना चाहिए उनका क्या कर्तव्य होना चाहिए। श्रावक को परमात्मा की वाणी पर श्रद्धा और विवेकवान होना चाहिए। क्रियान्वयन होना चाहिए। साध्वी अर्पिता ने 18 पापों पर प्रवचन देते हुए कहा कि क्रोध का अर्थ दूसरों की गलती की सजा खुद को देना है। क्रोध हमेशा कमजोर व्यक्ति पर निकलता है। आज हर मानव व्रत, अ_ाई, मासखमरण की तपस्या करता है परंतु यदि उसने क्रोध को नहीं त्यागा तो सब व्यर्थ है और ये क्रोध ही हमारी आत्मा का पतन करती है। रविवार को आचार्य आनंद ऋषि व उपाध्याय केवल मुनि की जयंती मनाई जाएगी।
Published on:
10 Aug 2018 07:33 pm
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