#Lok_Sabha_Election_2019 : भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों को रास आता है ‘बेणेश्वर धाम’, जानिए कब-कब आए मोदी-राहुल

#Lok_Sabha_Election_2019 : भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों को रास आता है ‘बेणेश्वर धाम’, जानिए कब-कब आए मोदी-राहुल

deendayal sharma | Publish: Apr, 23 2019 12:00:40 PM (IST) | Updated: Apr, 23 2019 12:07:44 PM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. देश के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी या इससे पूर्व के बड़े नेता सभी को राजनीतिक पहलू से वागड़ खूब रास आता है। चुनाव महासमर में राजनीति कीा रोटियां सेंकने के लिए नेता बेणेश्वर धाम को वागड़ में पहली पसंद बनाते चले आए हैं। यही कारण है कि चाहें भाजपा पार्टी से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी हों, लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस से सोनिया गांधी या अन्य कोई अधिकांश वागड़ की धरा पर राजनीति के दांव खेल चुके हैं।

धार्मिक महत्व इसनिए चुनते हैं बेणेश्वर धाम
जैसा कि जग जाहिर है कि बेणेश्वर धाम का धार्मिक महत्व सिर्फ वागड़ में ही नहीं है बल्कि आदिवासियों की यह देवस्थली पूरे प्रदेश अपितु देश-दुनिया में लोग इसे भलिभांति जानते हैं। वागड़ के लोगों के रगरग में बसे बेणेश्वर धाम के महत्व को भुनाने के लिए ही राजनीतिक पार्टियों के नेता यहां सभाएं करने से नहंी चूकते।

Video : "चुनावों में ही क्यों याद आता है बेणेश्वर धाम, बारिश में जब बनता है टापू तब कहां होते हैं सब"

सदैव से आस्था का केंद्र रहा है बेणेश्वर धाम
तीन नदियों का संगम और आदिवासियों के आराध्य मावजी महाराज के कारण बेणेश्वर धाम वागड़ के लोगों के लिए सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है। वागड़, कांठल, मेवाड़ के लोगों के लिए बेणेश्वर धाम को लेकर हमेशा ही विशेष महत्व रहा है। और यही शायद यही कारण है कि वागड़ के लोगों के दिलों में बसने वाले बेणेश्वर धाम को सभा के लिए चुनकर वोटर्स के मन में बसना चाहती हैं पार्टियां।

चुनावी दांव पेंच खूब, विकास सिफर
एक ओर जहां दिग्गज नेता चुनावी दंगल में विरोधी को पटखनी देने की सेाच के साथ बेणेश्वर में सभाएं कर चुके हैं। वहीं, अगर बेणेश्वर धाम के विकास की बात करें तो सभी बौने ही नजर आते हैं। धाम के विकास का आलम यह है कि चंद घंटों की बारिश के बाद धाम टापू बन जाता है और न यहां से कोई बाहर जा सकता है और न ही कोई भीतर जा सकता है। इसके अलावा अन्य कई ऐसे मुद्दे हैं, जो बेणेश्वर धाम को विकास की स्पर्धा में पीछे रखते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि भविष्य में कोई नेता इसके विकास के बारे में सोचेगा कि धाम महज राजनीति का अखाड़ा ही बनकर रह जाएगा।

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