
baran police station
यह अजब ही है ,लेकिन बारां पुलिस इस काम को अंजाम दे रही है। 20 हजार घरों के कस्बे और सवा लाख लोगों की भीड़ को संभालने को यहां केवल तीस पुलिसकर्मी तैनात है। इसमें चाह चोरी चकारी हो या लूट,दंगा अथवा एक्सीडेट। हर काम इन्हें ही संभालना पड़ता है।
बारां. में मौसम में बदलाव के साथ सर्द होती जा रही राते चोरों के लिए मुफीद साबित होने लगी है। सर्द रातों में शातिर चोर रैकी कर सूने मकानों को निशाना बना रहे है। हाल ही में हुई चोरी की वारदातों में अधिकांश वारदाते सूने मकानों में ही हुई है। यहां नवम्बर माह में अब तक करीब एक दर्जन चोरी की वारदाते हुई हंै। नफरी कमी के चलते वर्तमान में शहर में रात के समय मात्र 30 जवान पहरेदारी कर रहे हैं।
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सूने ना छोड़े, बताकर जाएं
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शादी समारोह व अन्य कार्यो से बाहर जाने वाले लोगों को मकान सूना नहीं छोडऩा चाहिए। किसी पड़ोसी, परिचित या रिश्तेदार को जिम्मेदारी सौंपकर जाना चाहिए। इसके अलावा सम्बंधित बीट कांस्टेबल या थाने पर लिखित रूप से अवगत कराएं।
दो-तीन दिन ताला लटका होने, दरवाजे पर अखबार पड़े रहने पर शातिर मकान सूना होने का अंदाजा लगाकर वारदात कर देते है। यहां हाल ही दंडोतिया की बाड़ी, मांगरोल रोड, लंका कॉलोनी क्षेत्रों में वारदातें हुई है। चोरों ने सूने मकानों को निशाना बना हाथ साफ किया।
कहीं अधिकारी नहीं है तो कहीं
कोतवाली थाने के अलावा शहर में स्वीकृत चारों स्थायी पुलिस चौकियों में भी पर्याप्त नफरी नहीं है। कहीं प्रभारी अधिकारी नहीं है तो कहीं जवान नहीं है। प्रताप चौक पुलिस चौकी व हाउसिंग बोर्ड तेलफैक्ट्री चौकी पर जवान है, लेकिन प्रभारी अधिकारी नहीं है। इसी तरह टाउन चौकी पर एक मात्र प्रभारी अधिकारी के रूप में एक एएसआई है, वहां एक भी जवान की स्थायी नियुक्ति नहीं है। इसी तरह जिला चिकित्सालय पुलिस चौकी पर प्रभारी नहीं है। टाउन चौकी व जिला चिकित्सालय चौकी पर हैड कांस्टेबल को ही प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। वहीं व्यवस्थार्थ लगाई हुई अस्थायी चौकियों में भी समस्या है।
Published on:
26 Nov 2017, 5:10 PM IST
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