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पत्नी को नाराज किया तो घर में दुख आ जाएगा…यह हम नहीं कहते भागवत में लिखा है जानिए…

कभी पत्नी को नाराज नहीं करना चाहिए। पत्नी घर की लक्ष्मी है। घर में एकमत नहीं हो तो दुख और क्लेश बना रहता है
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बारां

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Shiv Bhan Singh

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Updated: 6 Dec 2017, 4:56 PM IST

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बारां.बड़ा बालाजी धाम पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा में एवं गौ रक्षा सम्मेलन में कथावाचक कमल किशोर नागर ने कहा कि कभी पत्नी को नाराज नहीं करना चाहिए। पत्नी घर की लक्ष्मी है। घर में एकमत नहीं हो तो दुख और क्लेश बना रहता है। इससे पहले पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया व उनकी पत्नी उर्मिला भाया ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना की। कार्यक्रम में पूरे जिले से हजारों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि कुल 125 बीघा में बनाए अस्थाई नंदग्राम में 25 बीघा भूमि पर कथा पांडाल सजाया गया है। 30 बीघा में आवासीय परिसर तथा 70 बीघा क्षेत्रफल में वाहन पार्किंग है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोजाना प्रवचन सुनने पहुंचें। उन्होंने बताया कि पिछले एक माह से इस आयोजन के लिए विभिन्न 60 समितियों में करीब 3 हजार गौसेवक सेवाएं दे रहे हैं। कथा स्थल पर 70 बीघा भूमि में 8 पार्किंग जोन बनाए गए हैं। इसमे सभी मार्गों से आने वाले चारपहिया एवं दुपहिया वाहनों की पार्किंग अलग-अलग होगी। उर्मिला जैन ने बताया कि कथा स्थल के नजदीक 30 बीघा भूमि पर अस्थायी आवासीय परिसर बनाया गया। इसमें महिला व पुरुष ब्लॉक अलग-अलग हैं। जिनमें अन्य राज्यों व बाहर से आने वाले 7 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन की व्यवस्था की गई है।

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कितना काम उसके भरोसे
संत कमलकिशोर नागर ने कहा कि लौकिक व्यवहार मेें कुछ चीजें हमें ईश्वर प्रदत्त मिलती है। घर-परिवार में सुख, सम्पत्ति या संतान की कमी होने पर हम दुखी हो जाते हैं। जरा सोचो, कितना काम उसके भरोसे छोड़कर कर रहे हो। हम भजन तो कर रहे हैं लेकिन उस पर भरोसा कम है। जबकि भजन से ज्यादा उसका भरोसा बड़ा है।
भजन 'मुसाफिर यूं क्यूं भटके रे, ले ले हरि का नाम, काम तेरो कभी न अटके रे... सुनाते हुए उन्होंने कहा कि हम ईश्वर पर आश्रित को देखना भूल गए। ईश्वर ने हमें सुंदर शरीर दिया, फिर दूसरी अपेक्षाएं क्यों बढ़ रही हैं। उसी पर आश्रित जीवन जीओ। समय से पहले वह नहीं देता है। सुबह मंदिर से कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें यजमान पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया व उर्मिला जैन ने श्रीमद् भागवत को मंच पर विराजित किया।

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कर्मगति को तीन बातों से समझ सकते हैं
उन्होंने कहा कि अपनी कर्मगति को तीन बातों से समझ सकते हैं। पहला, हमने कोयला उठाकर बाहर फेंका तो हाथ काले हो गए, वही हाथ मुंह पर लगे तो मुंह भी काला हुआ लेकिन इसे हम धो सकते हैं। दूसरा, कोई धूप में ज्यादा देर खड़ा रहा तो काला हो गया लेकिन क्रीम से कुछ दिन में वह ठीक हो जाएगा।तीसरा, जो जन्मजात काला है, उसे ईश्वर ही ठीक कर सकता है। इसी तरह, कर्म करते हुए रिश्वत या भ्रष्टाचार से गलत पैसा कमाया, तो समझ लेना मैने कोयला पकड़ लिया है। इस पाप को किसी पवित्र अनुष्ठान से दूर कर सकते हैं लेकिन जो जन्मजात आसुरी वृत्ति लेकर आए और उत्पात मचा रहे हैं, वे इसी भोग में जीवन बिताएंगे। हमें सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण तीन तरह के लोग दिखते हैं।
हम दोष रोज कर रहे हैं, इसलिए नित्य भजन को आदत बनाओ। किसी काम को ईश्वर की सौगंध खाकर पूरा मत करो, उसमें भरोसा बढ़ाओ। ईश्वर से मेरे तार जुड़े या नहीं, यह प्रयोग करके देखो।