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बारां में भी है काला हांड़ी इलाका….यहां अब भी कोई बीमार हो जाए तो सड़क नहीं नदी के रास्ते लाना पड़ता है मरीज को

हां जनाब सत्ताधीशों की इस लोकसभा सीट पर अब भी मरीज को चारपाई पर रखकर कांधे पर चारपाई को लाद कर शहर तक आना पड़ता है।
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बारां

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Shiv Bhan Singh

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Updated: 11 Jan 2018, 4:43 PM IST

बारां में भी है काला हांड़ी इलाका....यहां अब भी कोई बीमार हो जाए तो सड़क नहीं नदी के रास्ते लाना पड़ता है मरीज को

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बारां में भी है काला हांड़ी इलाका....यहां अब भी कोई बीमार हो जाए तो सड़क नहीं नदी के रास्ते लाना पड़ता है मरीज को
काला हांड़ी तो आपने सुना ही होगा लेकिन क्या यह सुना है कि बारां में भी एक इलाका ऐसा ही है। हां जनाब सत्ताधीशों की इस लोकसभा सीट पर अब भी कालाहांड़ी जैसे हालात हैं। यहां सड़कें तक नहीं हैं। अगर कोई बीमार हो जाए तो मरीज को चारपाई पर रखकर कांधे पर चारपाई को लाद कर शहर तक आना पड़ता है। वह भी भरी नदी के बीच से। स्कूल जाने वाले सैकड़ों बच्चे जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर स्कूल आते हैं। मांगरोल. गांव को ग्राम पंचायत मुख्यालय से जोडऩे वाली कई क्षेत्र के कई गांवों की सड़कें या तो बनी ही नहीं हैं या अधूरी हैं। ऐसे में तहसील क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को आजादी के इतने वर्षों बाद भी जरूरी समझी जाने वाली सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों को पास के बड़े कस्बे या शहर तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। गांव में जब बरसात में कोई बीमार हो जाए तब यह तकलीफ और बढ़ जाती है। बरसात में गांव से पास के अस्पताल तक पहुंचना भी भारी हो जाया करता है।
उपखंड क्षेत्र के ईश्वरपुरा पंचायत के गांव गुदरावणी से पगारा गांव तक जाने वाली तीन किलोमीटर सड़क नहीं बनी है। दोनों गांवों के बीच में बनी रियासतकालीन पुलिया भी कई बरस से क्षतिग्रस्त हो रही है।
गांव के लोगों को माळ खेत में जाने के लिए भी लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। महलपुर पंचायत मुख्यालय से मूंडिया गांव जाने की सड़क नहीं बनी है। नंदगांवड़ी से किशनगंज तहसील के पीपल्दा गांव के बीच में पार्वती नदी है। नदी में होकर पीपल्दा जाना पड़ता है। दोनों गांवों से नदी तक का रास्ता कच्चा व उबड़ खाबड़ है। यहां नदी पर पुल बना दिया जाए तो मांगरोल से पीपल्दा होकर रामगढ़ तक जाने का रास्ता तो सुगम होगा ही, सरहद पार के मप्र. के गांवों तक की पहुंच भी आसान हो जाएगी।
किशनपुरा पंचायत मुख्यालय से बैरवा बस्ती में एक किमी. की दूरी का रोड भी आज तक नहीं बना, बरसात में बस्ती के बाशिंदों को तकलीफ उठानी पड़ती है। क्षेत्र में ऐसे हालात कई जगह हैं, लेकिन सुधार की गति धीमी है।
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बमोरीकलां. समीपवर्ती पंचायत मुख्यालय जारेला के गांव काशीपुरा व जनकपुर में आजादी के इतने सालों बाद भी सड़क निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को कच्ची डगर पर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पंचायत सरपंच मधुबाला मीणा को कहना है कि कई बार निर्माण विभाग को काशीपुरा से जनकपुर होते हुए जारेला तक तीन किलोमीटर दूरी तक इस सड़क के प्रस्ताव बनाकर भिजवाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों द्वारा सड़क को पक्की करवाने की कार्यवाही देखने को नहीं मिल पा रही है। इस सड़क पर खेतों में से नहरी पानी बहने से कीचड़ हो जाने से चारपहिया वाहन तो दूर बल्कि लोगों को पैदल भी निकलना भारी पड़ जाता है। निर्माण विभाग इस सड़क का निर्माण करवा दिया जाए तो ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय पहुंचने के लिए आवागमन सुगम हो सकेगा। इस मामले में विभाग के सहायक अभियन्ता गजानन्द मीणा ने बताया कि अभी इस सड़क की कोई स्वीकृति जारी नहीं हुई है, विभागीय आदेश के बाद ही सड़क का निर्माण करवाया जाएगा।