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यहां महिलाएं ही नहीं बजरी भी प्रतिदिन नहाती है वह भी छुप कर .. इतना ही नहीं गंदगी दिखने पर फिर नदी में कूदती है…

यह अजूबा आप नहीं देख सकते। क्यों कि बजरी को नहलाने वाले और उसको नहाने से देखने नहीं देने वाले अवैध हथियारों से लैस होते हैं
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बारां

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Shiv Bhan Singh

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Updated: 12 Dec 2017, 4:26 PM IST

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बजरी को यहां कण-कण खिलाना पड़ता है सो उसे एक दो बार नहीं दसियों बार नहाना पड़ता है। हां बजरी को नहलाने वाले जरूरी नहीं कि प्रतिदिन नहाएं ही सही। लेकिन यह अजूबा आप ऐसे ही नहीं देख सकते। क्यों कि बजरी को नहलाने वाले और उसको नहाने से देखने नहीं देने वाले अवैध हथियारों से लैस होते हैं। अगर आप उनसे जबरदस्ती करें तो वह आप पर हमला कर सकते हैं। इस नजारे को आप बारां की पार्वती नदी में देख सकते हैं।

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कैसे नहलाते हैं
दरअसल नदी के तल में मौजूद बजरी को सैकड़ों महिलाएं और पुरूष नदी से निकालते हैं। फिर इस बजरी का कण-कण निखारने को इसे बार-बार पानी में डुबो कर नहलाया जाता है। अवैध खननकर्ता यह काम यहां धडल्ले से करते हैं। यह अपने काम को छुपाने को हमेशां हथियारबंद रहते हैं।

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मुफ्त में घिस रहे चंदन
पार्वती नदी से न केवल बजरी निकाली जा रही है बल्कि नदी के पानी से ही बजरी की धुलाई भी की जा रही है। फिर यहां से इस बजरी को ले जाकर बाजार में बेचा जा रहा है। पत्थर के मामले में भी ऐसा ही है।
हथौड़ों, गैंती-सब्बल के माध्यम से पत्थर तोड़ व निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरे जा रहे हैं। इसके बाद यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां फर्राटे भरते गुजरती है।

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ऐसे दिखे नजारे
शनिवार दोपहर पार्वती नदी में हाइवे किनारे आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एक ही जगह दिखी। इनमें से दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बजरी थी तो एक में बजरी भरी जा रही थी। एक में भरी बजरी की नदी के पानी से ही धुलाई की जा रही थी। दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खाली थी व एक में पत्थर भरे थे। यहां से कुछ दूरी पर कई और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी थी। इधर, बरडिय़ा इलाके में भी बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंच रही है, जिनकी यहां के पानी से धुलाई होते दिखती है।