
Sword in hand riding on a mare why is the bride
बारां जिले के छबड़ा कस्बे में दुल्हन साड़ी,या सलवार सूट में नहीं बल्कि दूल्हे की तरह शेरवानी व चूढ़ीदार पायजामा पहने व सिर पर साफा बांध कर हाथ में तलवार लिए सजी धजी घोड़ी पर सवार हुई। कस्बे में उसकी बिंदोरी निकाली गई। जिस किसी ने इस नजारे को देखा चौंक गया। यह नजारा छबड़ा निवासी गोविंद जांगिड़ के परिवार में मंगलवार रात देखने को मिला। इनके परिवार में बेटा नहीं है और सिर्फ चार बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी चंचल के विवाह समारोह में परिवार के लोगों ने बेटे की तरह घोड़ी पर बिठा कर दुल्हन चंचल की बिंदोरी बैंड बाजे, डीजे संगीत व आतिश बाजी के साथ निकाली तो बिंदोरी को देखने के लिए एकाएक चलते वाहन रुक गए। बिंदोरी में शामिल परिवारजन एवं अन्य रिश्तेदार जमकर थिरके।
बेटियां होने का है गर्व
दुल्हन चंचल की माता जयश्री जांगिड़ व पिता गोविंद जांगिड़ ने बताया कि उनके एक भी पुत्र नहीं है। चारों पुत्रियां हैं। जिन्हें उन्होंने पुत्रों की तरह ही पाला और भरपूर प्रेम दिया तथा हर जायज अरमान पूरे किए है। इन्हें बेटियां होने पर गर्व हैं। जरूरी नहीं बेटा ही हो बेटियों को भी बेटों की तरह पाला जा सकता है। इनकी यही कामना है कि हर परिवार बेटी का सम्मान करें उसे पढ़ाए तथा आत्म निर्भर बनाए।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
एक और आए दिन बेटियों को कोख में ही मारने के समाचार देखने व सुनने को मिल रहे हैं तो कहीं झाडिय़ों, शौचालयों व जंगलों में लावारिस अवस्था में जिंदा या मृत बेटियां मिल रही है और ममता शर्मसार हो रही है। बेटी के जन्म को अभिशाप समझा जा रहा है। इसके लिए देश भर में सरकारों व अन्य संस्थाओं द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए आमजन को भी जागरुक किया जा रहा है। वहीं कुछ परिवार ऐसे भी हैं जो बेटियों को भरपूर प्यार दे रहे हैं एवं बेटों की तरह उनके अरमानों को पूरा कर रहे हैं।
Published on:
30 Nov 2017, 2:57 PM IST
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