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मशीन का बारहवां, सुना है आपने,बारां अस्पताल यह करने जा रहा है……

पहले तो कर्मचारियों ने इसे काम ही नहीं लिया। काम लिया तो मात्र 354 सिटी स्कैन की और उसे 12 वर्ष तक पटके रखा।
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बारां

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Shiv Bhan Singh

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Updated: 22 Dec 2017, 8:18 PM IST

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मशीन का भी बारहवां होता है यह कर दिखाया है बारां के अस्पताल ने। यहां सिटी स्कैन के लिए एक करोड़ से अधिक मूल्य की मशीन सरकार ने लगाई थी। पहले तो कर्मचारियों ने इसे काम ही नहीं लिया। काम लिया तो मात्र 354 सिटी स्कैन की और उसे 12 वर्ष तक पटके रखा। बारह वर्ष में बिना काम के मशीन का बारहवां होने के बाद अब इसे कबाड़ में बेचने की तैयारी की जा रही है। इस मशीन की लागत से भी सिटी स्कैन की लागत निकाले तो 30 हजार रूपए की प्रति स्कैन दर आ रही है। वाह री सरकार और वाह रे उसके कर्मचारी। बारां. बारां जिला चिकित्सालय में रोगियों की सुविधा के लिए एक दशक पूर्व 1 करोड़ 5 लाख रुपए की लागत से खरीदी गई सिटी स्कैन अब कबाड़ में बेची जाएगी। इसके लिए जिला चिकित्सालय प्रशासन को स्वास्थ्य निदेशालय जयपुर से हरी झंडी मिलने का इन्तजार है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि उक्त तत्कालीन भाजपा शासन में खरीद कर यहां स्थापित की गई थी। अब इसी भाजपा के राज में इस मशीन को बेचने की तैयारी पूरी कर ली गई है। बीते 12 वर्षों में इस मशीन का लाभ महज 354 रोगियों को ही मिल सका है। पिछले छह वर्षों से तो इस मशीन का उपयोग ही नहीं हो रहा।

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कुछ वर्ष ही हुआ संचालन
राज्य सरकारने वर्ष 2005 में एक करोड़ 5 लाख,69 हजार रुपए की तोशीबा कम्पनी की सिटी स्कैन मशीन खरीदकर जिला चिकित्सालय को उपलब्ध कराई थी । 6 मई 2005 को इसका लोकार्पण किया गया। करीब चार वर्षो तक तो इसका नियमित संचालन किया गया। बाद में प्रशिक्षित चिकित्सक व रिपोर्टिंग के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण उसका उपयोग कम होता गया। जुलाई 2011 के बाद से इस मशीन से एक भी सिटी स्कैन नहीं की गई।
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नहीं लगाए प्रशिक्षित कर्मचारी
सरकार ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ रुपए से अधिक की सिटी स्कैन मशीन खरीदी। बाद में इसके रख-रखाव पर लाखों रुपए खर्च किए गए। अब इसे कबाड़ में डाल दिया गया। चिकित्सा सूत्र बताते है कि इस मशीन के संचालन के लिए सरकार ने प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए ही नहीं। ऐसे में यहां पदस्थ एक-दो चिकित्सकों को ही प्रशिक्षित कर कुछ वर्षों तक इस मशीन का उपयोग किया जा सका।
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अब उदयपुर से हो रही रिपोर्ट
वर्ष 2011 में सीटी स्कैन मशीन को कंडम घोषित कर कबाड़ में पटक दिया गया। वर्ष 2016 में सिटी स्कैन जांच सुविधा मय मशीन पीपीपी मोड पर संचालन के लिए उदयपुर की संस्था कल्पना चावला नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड से सरकार के स्तर पर एमओयू किया गया। संस्था ने यहां नवनिर्मित आउटडोर भवन में सिटी स्कैन मशीन लगाकर उसका संचालन भी शुरू कर दिया है। गत 15 दिसम्बर से अब तक एक मरीज की सिटी स्कैन की गई है। इसकी रिापोर्ट उदयपुर से मिलती है।
& सिटी स्कैन मशीन को नीलाम करने के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को प्रस्ताव भेजे हुए हैं। मेरे यहां ज्वाइन करने से पूर्व मशीन के रखरखाव पर राशि खर्च की गई होगी, लेकिन अब पीपीपी मोड पर संचालन शुरू कर दिया गया है।
डॉ. संपतराज नागर, पीएमओ, जिला चिकित्सालय