एक्सपर्ट व्यूबारां जिले की पार्वती नहर को तत्कालीन कोटा रियासत की पहली नहर होने का गौरव मिला है। इसकी खूबियों से लोग अचरज में पड़ जाते है। पार्वती नदी के किशनपुरा बंधा (कच्चा बांध) से इसका उद्गम होता है। आगे चलकर इसमें से रजवाह ब्रांच निकालने से सिंचाई का दायरा बढ़ गया है। जिले के इस पहले नहरी तंत्र से हजारों किसान परिवारों को संबल मिलता है। राज्य सरकार ने हाल ही में बड़ी राशि मंजूर की है। कई बरसों तक बारां में पदस्थ रहने से मैंने इस तंत्र का विस्तृत अध्ययन किया है। जरूरत, इसके उन हिस्सों के सारसंभाल की है, जो जल प्रवाह के दौरान दरक जाते है। इससे पानी का रिसाव भी होता है। इसके रुकने से किसानों का असमय होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। अब तक इस नहर का संचालन डायवर्जन सिस्टम से हो रहा है, लेकिन सिंचित क्षेत्रफल को बढ़ाने के लिए किशनपुरा बंधे की चौड़ाई बढा पानी को लिफ्ट भी किया जा सकता है। इससे किसानों को दोनों फसलों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।