27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

क्यों हो गई बंदी की बोलती बंद,ऐसा क्या खतरनाक काम हो रहा है बारां की जेल में

प्रताडना से तंग आकर आत्महत्या करने की सोच ली थी। इसी के चलते फंदा लगाया था। लेकिन अस्पताल से वापस होते ही क्यों उसके सुर बदल गए।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बारां

•

image

Shiv Bhan Singh

•

Updated: 11 Dec 2017, 3:05 PM IST

Human right voilation in jails in rajasthan,torcher in rajasthan jail,medical facility for captives in jail in rajasthan, medical facility for captives in jail inbaran, alligation on jail administration at baran,alligation on doctors in rajasthan,cenral jail rules for captive,rajasthan patrika,baran patrika,latest news in baran,

baran jail

गंभीर रूप से बारां अस्पताल लाए बंदी ने पहले तो जेल प्रशासन पर प्रताडऩा के आरोप लगाए। उसने जेल में मारपीट करने और सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते कहा कि प्रताडना से तंग आकर आत्महत्या करने की सोच ली थी। इसी के चलते फंदा लगाया था। लेकिन अस्पताल से वापस होते ही क्यों उसके सुर बदल गए। जेल के चिकित्सक भी ऐसा कोई वाक्या होने से इनकार करते रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि जेल में आखिर ऐसा हो क्या रहा है। क्या अब भी अंग्रेजों की माफिक बंदियों को थर्ड डिग्री से प्रताडि़त किया जा रहा है। अगर नहीं तो बंदी ने क्यों ऐसे आरोप लगाए और जेल वापस जाने की बात आते ही वह क्यों सहम गया। क्यों उसकी बोलती बंद हो गई। जो भी हो इस मामले में जिला प्रशासन के साथ मानवाधिकार आयोग को गंभीरता से जेल का निरीक्षण करना चाहिए और अगर कुछ गुपचुप हो रहा है तो उसका पर्दाफाश करना चाहिए। दरअसल बंदी दिनेश प्रजापति ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे।

Read more : पहले निकालते बेईमानी का भूत,फिर करते योजना लांच, जानिए सरकारी कारिंदों की कारस्तानी

स्वास्थ्य बिगड़ रहा

बारां जेल में इन दिनों जिला कारागार के बंदियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। चार बंदियों को उपचार के लिए जिला कारागार से रैफर किया गया। इसके बाद उल्टी से तबीयत बिगडऩे पर ज्यादती के आरोपित बंदी दिनेश प्रजापति को जिला चिकित्सालय भर्ती कराया था। हालांकि तबीयत में सुधार होने पर उसे चिकित्सालय से डिस्चार्ज कर दिया गया। इस दौरान प्रजापति ने जेल में उससे मारपीट की जाने तथा उसने आत्महत्या का प्रयास करने की बात कही थी, लेकिन जेल में उसने इस तरह की जानकारी नहीं दी। जेल प्रशासन व चिकित्सकों की ओर से इसकी पुष्टी भी नहीं की जा रही है।

Read more :धनकुबेर की गद्धी पर कब्जा करने को सियासी चालें कर रहीं सबकों हैरान..देखें कौन क्या कर रहा है?

यह कहना है इनका
जिला कारागार में बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंचे चिकित्सक रघुराज यादव का कहना है कि े उन्होंने जेल के सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसमें चार बंदियों को उल्टी, बुखार, आंख व सिरदर्द के चलतेे रैफर किया था। इसके अलावा पोक्सो एक्ट के एक बंदी को मनोचिकित्सक से परामर्श के लिए भेजा गया था। फंदा लगाने का कोई बंदी रैफर नहीं किया गया। वहीं जिला चिकित्सालय के फिजीशीयन डॉ. हंसराज सुमन का कहना है कि उन्होंने उल्टियां होने से भर्ती बंदी को देखा था। फंदा लगाने के मामले में कोई बंदी नहीं पहुंचा। इधर, जिला कारागार के उपाधीक्षक राजेन्द्र यादव ने बताया कि फंदे वाली कोई बात नहीं है, एक बंदी ने भूखे पेट गोली खाली थी, इससे उल्टी होने पर उसे चिकित्सालय भर्ती कराया था। तबीयत में सुधार होने पर उसे डिस्चार्ज करने पर जेल दाखिल किया गया।