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स्वतंत्रता संग्राम में बरेली कॉलेज का अहम योगदान

बरेली कॉलेज की इमारत सिर्फ एक शिक्षण संस्थान ही नही है बल्कि इस इमारत के सीने में आजादी की लड़ाई की तमाम कहानियां दफन है।
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बरेली

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Bhanu Pratap Singh

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Updated: 10 Aug 2018, 1:51 PM IST

Bareilly college

स्वतंत्रता संग्राम में बरेली कॉलेज का अहम योगदान

बरेली। रुहेलखंड में हुई आजादी की लड़ाई का मुख्य केंद्र बरेली था और बरेली ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। आज भी स्वतंत्रता संग्राम की तमाम निशनियाँ बरेली में मौजूद है। उन्ही में एक है बरेली कॉलेज। बरेली कॉलेज की इमारत सिर्फ एक शिक्षण संस्थान ही नही है बल्कि इस इमारत के सीने में आजादी की लड़ाई की तमाम कहानियां दफन है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1965 में राष्ट्रभाषा हिन्दी के आंदोलन तक में इस कॉलेज की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है खास बात यह है कि आजादी की लड़ाई में यहां के छात्रों के साथ ही शिक्षकों ने भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका था।

1837 में हुई स्थापना

इस कॉलेज की स्थापना 1837 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हुई थी लेकिन जब अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में क्रांति का बिगुल बजा तो रुहेलखण्ड में इस आंदोलन की बागडोर रुहेला सरदार खान बहादुर खान के हाथ मे थी और उनके नेतृत्व में क्रांतिकारी अंग्रेजों से लोहा ले रहे थे।बरेली कॉलेज के शिक्षक मौलवी महमूद हसन और फ़ारसी शिक्षक कुतुब शाह समेत तमाम राष्ट्रवादी छात्र इस आंदोलन में शामिल हुए। बरेली कॉलेज में तमाम बैठकें भी होती थी और क्रांतिकारियों ने कॉलेज के प्रिंसपल डॉक्टर कारलोस बक को भी मौत के घाट उतार दिया था।

इन्होंने दिया योगदान

कॉलेज में फारसी पढ़ाने वाले शिक्षक कुतुब शाह नवाब खान बहादुर खान के समस्त आदेश और फरमान प्रेस में छाप कर लोगों के बीच बाटते थे।कुतुब शाह ने एक तरह से अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था।जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ कर फांसी की सजा सुनाई गई जो बाद में काला पानी में बदल गई और सजा काटते समय उनकी अंडमान में मौत हो गई।इसके साथ ही रामपुर निवासी जैमीग्रीन बरेली कॉलेज के छात्र थे और वो बेगम हजरत महल के चीफ इंजीनियर के रूप में काम किया था और उन्होंने सिकन्दर बाग का युद्ध जैमीग्रीन ने लड़ा था और उन्हें उन्नाव में फ़ौज में जासूसी करते वक्त गिरफतार हुए और उन्हें फांसी दी गई।

तमाम छात्र रहे क्रांतिकारी

1857 से शुरू हुआ आंदोलन देश की आजादी तक शामिल रहा। महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में भी बरेली कॉलेज के तमाम छात्र शामिल हुए तो सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज के लिए भी यहाँ के छात्रों ने छात्र संघ कोष का सारा पैसा देने का प्रस्ताव पारित किया था। यहाँ के छात्र कृपनन्दन ने कॉलेज में तिरंगा फहराया था। शहीदे आजम भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह ने यहाँ एक साल लॉ की पढ़ाई की और क्रान्ति में हिस्सा लिया। इसके साथ ही यहाँ के छात्र दरबारी लाल शर्मा,सतीश कुमार ,रमेश चौधरी, दामोदर स्वरूप और कृष्ण मुरारी ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी।

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