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बाड़मेर में 20 करोड़ का फर्जी क्लेम बेनकाब, वाहन चोर गिरोह के 12 आरोपी शिकंजे में, परिवहन विभाग-बीमा कंपनी पर सवाल

बाड़मेर पुलिस ने 20 करोड़ के फर्जी वाहन चोरी क्लेम घोटाले का भंडाफोड़ कर मास्टरमाइंड सताराम को दबोच लिया है। आरोपी बीमा कंपनियों से झूठे केस दर्ज कर क्लेम उठाता था। परिवहन विभाग, बीमा कंपनी और पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

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आरोपी गिरफ्तार (फोटो- पत्रिका)

बाड़मेर: गुड़ामालानी थाना पुलिस ने सोमवार को वाहन चोरी के झूठे केस दर्ज करवाकर बीमा कंपनियों से 20 करोड़ रुपए के फर्जी क्लेम उठाने वाले के गिरोह का पर्दाफाश कर मास्टरमाइंड सताराम को गिरफ्तार किया है। फर्जी तरीके से पंजीयन हुए वाहनों को तेल कंपनी नागाणा में भी लगा दिया।

बता दें कि सताराम की अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति की जांच के लिए आयकर विभाग व ईडी को पत्र लिखा गया है। जोधपुर रेंज में पिछले 10 साल में दर्ज वाहन चोरी के प्रकरणों पर विश्लेषण किया जा रहा है।


एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने बताया कि गुड़ामालानी थाने में वाहन चोरी का एक प्रकरण दर्ज हुआ। गुड़ामालानी डिप्टी सुखाराम के सुपरविजन में गुड़ामालानी थानाधिकारी देवीचंद ढाका के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया। पड़ताल में गिरोह का खुलासा हुआ। मास्टरमाइंड सताराम पुत्र देरामाराम निवासी रावतसर, सदर, बाड़मेर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने तीन वाहन बरामद कर हनुवंत सिंह, जोगेंद्र चौधरी, मोहनराम, विशनाराम, चिमन सिंह, मांगीलाल, देवाराम और शेराराम को नामजद किया है।


कई वाहनों का अस्तित्व ही नहीं


शिव, सिणधरी, जसोल, पचपदरा व सेंदड़ा में दर्ज प्रकरणों में वाहन ही अस्तित्व में नहीं थे। इन वाहनों के लिए कूटरचित दस्तावेज से अरूणाचल प्रदेश से पंजीयन करवाया। राजस्थान में रिअसाइनमेंट करवा किसी दूसरी गाड़ी पर नंबर प्लेट लगवाकर बीमा करवा दिया और वाहन चोरी की एफआईआर होने के बाद क्लेम उठा लिया।


परिवहन विभाग और बीमा कंपनी भी संदेह के दायरे में

इस तरह से हुए बड़े फर्जीवाड़े में कहीं न कहीं परिवहन विभाग व बीमा कंपनियों की भी भूमिका संदेह के दायरे में है। पुलिस ने परिवहन से जुड़े मामले को लेकर पत्र भी लिखा है। साथ ही बीमा कंपनियों के कार्मिकों से पूछताछ होगी। इसके अलावा बालोतरा जिले के एक एएसआई की भूमिका भी संदिग्ध है। उसकी जांच के लिए बालोतरा एसपी को पत्र लिखा है।

ऐसे वारदात को देता था अंजाम

जांच में सामने आया है कि सताराम स्वयं या अपने मिलने वाले के नाम पर ट्रक खरीदता और अलग-अलग बीमा करवाकर कर वाहन चोरी होने की झूठी एफआइआर थाने में दर्ज करवा देता। इसी को आधार बनाकर बीमा कंपनी से क्लेम उठा लेता।


अब तक जांच में चार साल में 12 प्रकरण विभिन्न थानों में दर्ज करवाए गए हैं, जिसमें बाड़मेर के गुड़ामालानी, शिव, बालोतरा के बायतु, पचपदरा, बालोतरा, जसोल व सिणधरी के अलावा जोधपुर ग्रामीण के आसोप, ब्यावर, जेतारण में मुकदमे दर्ज हैं। 12 मुकदमों से 20 करोड़ रुपए का क्लेम उठा लिया।


45 लाख मूल्य की गाड़ी तस्करों को बेची


मास्टरमाइंड ने एक लग्जरी हाईलक्स गाड़ी फाइनेंस पर खरीदकर 15 लाख रुपए की छूट का फायदा उठाकर 3 लाख रुपए के लागत मूल्य से 45 लाख रुपए का क्लेम उठा कर वाहन डोडा तस्करों को बेच दिया। वहीं, कई वाहन तो जला दिए और फिर क्लेम उठा लिया।


ज्यादातर ट्रक व ट्रेलर


आरोपियों ने अधिक क्लेम उठाने के लिए ज्यादातर ट्रक व ट्रेलर की चोरी की एफआईआर करवाई है। ताकि उसे ज्यादा क्लेम राशि मिल सके। वहीं, इसके बाद वाहनों का पुन: अन्य राज्यों से रिअसाइनमेंट करवाकर तेल कंपनियों में वाहनों को किराए पर चला रहे थे। चोरी का मुकदमा दर्ज होने के बाद चैचिस नंबर घिसकर नए नंबरों के लिए अरूणाचल प्रदेश में पंजीयन करवा देते। इसी आधार पर राजस्थान एवं गुजरात में पंजीयन किया गया है।


विदेश भागने की थी तैयारी

मास्टरमाइंड सताराम शातिर है। मामला दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी होने का संदेह होने पर विदेश भागने की तैयारी कर उत्तरप्रदेश से अपने पुत्र को लेकर आते हुए स्वयं जयपुर में उतर गया। जहां वीजा बनाने की तैयारी चल रही थी। इस बीच गुड़ामालानी पुलिस ने दबोच लिया।


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