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थार के धोरों का कमाल: चीन में 4 घंटे 13 मिनट में 50 किमी दौड़ा हवलदार जितेन्द्र

- 5 मई को चीन में हुई प्रतियोगिता में रहे 29 वें स्थान पर- कांकरला का जितेन्द्रसिंह तीनों सेनाओं में 50 किमी रेस का तीन साल से लगातार गोल्ड
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बाड़मेर

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bhawani singh

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Updated: 20 May 2018, 12:21 PM IST

Gold medalist in barmer

Gold medalist in barmer

बालोतरा. थार के धोरों के गांव कांकरला में दौडऩे वाला जितेन्द्रसिंह सेना की वॉक रेस की एेसी प्रतिभा है कि उसको तीन साल से कोई भी नहीं पछाड़ पाया है। लगातार तीन बार गोल्ड मेडल जीतने वाले जितेन्द्र को इसके बूते देश का प्रतिनिधित्व अंंतरराष्ट्रीय स्तर पर कने का मौका मिला। 5 मई को चीन के ताइचांग शहर में 50 किलोमीटर वॉक रेस में दौड़ा तो विश्व में 29 वें नंबर पर था। इससे उसका आत्म विश्वास बढ़ा और जितेन्द्र ओलंपिक 2020 में तिरंगा फहराने का लक्ष्य लेकर कड़ी मेहनत कर रहा है।

गौरतलब है कि बाड़मेर के ही खेताराम ने ओलम्पिक में शिरकत कर थार का मान बढ़ाया था, अब जितेन्द्र भी ओलम्पिक की तैयारियों में जुटे हुए हैं। समदड़ी के पास कांकरला गांव के जितेन्द्रसिंह राठौड़ ने वर्ष 2008 में सेना में भर्ती हुए, अभी मेरठ में हवलदार है। सेना में भर्ती होनेे के बाद उन्होंने खेलों की ओर ध्यान देते हुए वॉक रेस में भाग लेना शुरू किया। धावक जितेन्द्रसिंह की मेहनत का नतीजा है कि पिछले तीन साल से तीनों सेनाओं में 50 किमी वॉक रेस में लगातार गोल्ड मेडलिस्ट है। इसी कारण आइएएएफ की ओर से इस प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और इस साल 5 मई को चीन में हुई प्रतियागिता में उन्होंने 4 घंटे 13 सैकेण्ड में वॉक रेस पूरी कर 29 वां स्थान प्राप्त किया है। जितेन्द्र ने पत्रिका को बताया कि उनका लक्ष्य ओलंपिक 2020 है। इसके लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।

पिता के नक्शे कदम पर

जितेन्द्र के पिता रेवंतसिंह भी सेना में कैप्टन थे। वे सेना के अच्छे धावक रहे हैं और अमरीका और चीन में हुई प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। जितेन्द्र का छोटा भाई भी सेना में सिपाही है, जिसकी भी खेलों में रुचि है। जितेन्द्र ने बताया कि रेस का प्रशिक्षण परिवार से ही उनको मिला है।


रेगिस्तान देता है संबल

सेना का प्रशिक्षण सबसे ज्यादा मायने रखता है। इसके अलावा रेगिस्तान की पृष्ठभूमि है। यहां युवा मजबूत है। प्रशिक्षण मिले तो काफी आगे बढ़ सकते हैं। युवाओं को शिक्षा के साथ खेल पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।- हवलदार जितेन्द्रसिंह