मुख्यमंत्री से हुई थी नौकरी की बात
लक्ष्मण की बहादुरी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उसे फोन कर बधाई दी। चालीस वर्षीय लक्ष्मण ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि अग्निशमन विभाग में चालक की सरकारी नौकरी मिल जाए तो उसके लिए बड़ा तोहफा होगा। मुख्यमंत्री ने कागजात के साथ बाड़मेर के तत्कालीन सांसद हरीश चौधरी से मिलने को कहा। पांचवीं पास लक्ष्मण सांसद के माध्यम से जयपुर जाकर मुख्यमंत्री से मिला तो बताया गया कि जैसलमेर के नसीरखां की फाइल भी साथ लाओ। नसीरखां ने भी ऐसे ही बहादुर दिखाई थी। इस तरह नौकरी अटक गई। उसके बाद लक्ष्मण चार बार मुख्यमंत्री से मिला, लेकिन नौकरी नहीं मिली। बाद में भाजपा की सरकार आई और चली गई। 2018 में गहलोत फिर मुख्यमंत्री बने, लक्ष्मण फिर मिला, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब वह बावन वर्ष का हो गया, पर नौकरी की आस अभी भी लगाए हुए हैं।