
Barmer News
दिलीप दवे@बाड़मेर. जिले के खेड़ गांव में रविवार तड़के बस में आग की घटना ने जहां दो जिंदगियां ले ली तो सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल दी। हादसे के वक्त बस में आग बुझाने के इंतजाम नहीं होने से यात्रियों के पास उपलब्ध पानी की बोतलों व सड़क किनारे की रेत के सहारे आग बुझाने के विफल प्रयास हुए।
कभी रोडवेज के बेड़े में साधारण बसें होती थीं। पर अब स्लीपर कोच, वोल्वो व स्लीपर एसी कोच बसें शामिल की गई हैं। इनसे यात्रियों को सुविधा मिल रही है व रोडवेज को भी फायदा हो रहा है, लेकिन ये बसें यात्रियों की सुरक्षा के मापदंडों पर खरी नहीं है। क्योंकि इनमें आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम ही नहीं है। रोडवेज की स्लीपर बस में आग लगी तो यह पोल सामने आई। आग लगने पर चालक व परिचालक पानी के लिए इधर-उधर भागे। बस में यात्रियों, चालक, परिचालक के पास पानी की बोतलें थी, उनमें भी पानी कम था। एेसे में आग नहीं बुझ सकी। यदि बस में छोटा अग्निशमन यंत्र होता तो शायद एक महिला व बच्ची की जिंदगी बच जाती।
मामूली बजट व एक आदेश से हो सकती है व्यवस्था
बसों में आगू पर काबू के लिए छोटा अग्निशमन यंत्र लगाया जा सकता है। इस पर खर्च भी बमुश्किल पन्द्रह सौ से दो हजार रुपए है, यह आसानी से उपलब्ध है। रोडवेज बेड़े में इसे शामिल करने के लिए एक आदेश व मामूली बजट की जरूरत है।
फैक्ट फाइल
52 डिपो हैं प्रदेश में रोडवेज के
4700 बसें हैं रोडवेज के बेडे़ में
9,50,000 यात्री औसतन रोज यात्रा करते हैं रोडवेज बसों में
18 लाख किमी प्रतिदिन औसतन चलती है परिवहन निगम की बसें
जरूरी है सुरक्षा इंतजाम
-सड़कों पर दौड़ रहे हर वाहन में आग बुझाने के पुख्ता प्रबंध होने चाहिए। यह कानूनन भी जरूरी भी है। क्योंकि हादसा कभी भी हो सकता है।- डी डी मेघाणी, जिला परिवहन अधिकारी, बाड़मेर
नहीं है अग्निशमन यंत्र
- रोडवेज की सभी बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं है। वर्ष 2017 मॉडल की इक्का-दुक्का बसों में जरूर अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। पुरानी बसों में लगाने के आदेश हमारे पास नहीं है।- बी आर बेड़ा, आगार प्रबंधक, रोडवेज आगार बाड़मेर
Published on:
14 Nov 2017, 11:43 AM IST
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