बिश्नोई समाज की मान्यता के अनुसार होली दहन में लकड़ियों का इस्तेमाल होता है और ज्वाला के दौरान सैकड़ों कीट-पतंगों इसमें गिरकर मर जाते हैं, इसलिए होली दहन के दौरान कहीं ज्वाला भी देखना पसंद नहीं करते। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों में रहने वाला बिश्नोई समाज इसी तरीके से होली मनाता है। बिश्नोई समाज के लोग खुद को प्रह्लाद पंथी मानते हैं।