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डेढ़ माह तक नाबालिग को बंदी बना करता रहा गंदा काम, पांच महीने बाद मिली ऐसी सजा, जिंदगी भर रहेगा याद

नाबालिग अपनी सहेलियों के साथ 30 मार्च को बिंता के मेले में पहुंची थी। यहां आरोपी भुनेश्वर भी यहां मौजूद था। उसने नाबालिग से छेड़छाड़ की और उसके बाद
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बस्तर

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ajay shrivastav

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Updated: 31 Oct 2017, 12:28 PM IST

जगदलपुर . लोहांडीगुड़ा ब्लॉक के बिंता के लिमउपदर गांव से नाबालिग को अगवा कर डेढ़ माह तक अनाचार करने के मामले में भुनेश्वर नाग (24) को दोषी ठहराते हुए चार अलग-अलग मामलों में 10 व 7 साल की सजा सुनाते हुए 4 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायधीश निरंजन लाल चौहान ने यह फैसला सुनाया है। वहीं नाबालिग की तरफ से पैरवी वरूणा मिश्रा ने की।

जानकारी मुताबिक नाबालिग अपनी सहेलियों के साथ 30 मार्च को बिंता के मेले में पहुंची थी। यहां आरोपी भुनेश्वर भी यहां मौजूद था। उसने नाबालिग से छेड़छाड़ की और उसके बाद जबरदस्ती उठाकर ले गया। 13 मई को वह किसी तरह आरोपी की चुंगल से छूटी और मारडूम थाने पहुंचकर इसकी जानकारी। पुलिस ने भी बिना देरी किए धारा 363, 366,376 व पॉक्सो की धारा 6 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आरोपी की पतासाजी करते हुए पुलिस ने 19 जून को आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। अदालत ने इस मामले में पांच माह के अंदर फैसला सुनाते हुए धारा 363 के तहत 7 वर्ष, 366 के तहत 10 वर्ष, धारा 376 के तहत 10 वर्ष व पॉस्को की धारा 6 के तहत 10 की सजा सुनाई। वहीं सभी मामलों में हजार-हजार रुपए का अर्थ दंड भी लगाया।

वहीं मामले में भानपुरी निवासी भागवत बघेल को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के श्याम नारायण बनाम दिल्ली राज्य का केस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि इस तरह का अपराध सिर्फ व्यक्ति विशेष के प्रति नहीं होता, बल्कि संपूर्ण समाज के उपर होता है। इसलिए अपराध करने वाले व्यक्ति को कठोर दंड दिया जाना चाहिए।

पीडि़ता को 50 हजार रुपए देने के आदेश
अदालत ने इस मामले में एक और अहम सुनवाई की। जज निरंजन लाल चौहान ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित करते हुए कहा कि इस मामले में सीआरपीसी की धारा 357 पीडि़त प्रतिकर योजना के अंतर्गत पीडि़ता को पचास हजार रुपए देने के भी आदेश दिए हैं।