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नगर निगम ने ये काम कराने जनता से लिए 1 करोड़, फिर बैठ गई शांत, जानिए क्या है मामला

25 हजार मकान मालिकों के एक करोड़ जमा पर नहीं बने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सरकार के निर्देश के बावजूद 90 फीसदी मकानों में नहीं बन पाएं।
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बस्तर

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Badal Dewangan

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Updated: 28 May 2018, 9:46 AM IST

नगर निगम

Rainwater Harvesting

अमित मुखर्जी/जगदलपुर. शहर के सभी मकानों में बारिश के पानी को जमीन के नीचे पहुंचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जा चुका है, लेकिन नगर निगम ने बारिश के पानी को रोकने की कोई तैयारी नहीं की है। गिनती भर के मकानों में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। यह आश्चर्यजनक तथ्य है कि शहर में पर्याप्त बारिश के बावजूद शहरवासी गर्मी के दिनों में एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। कई जगह पानी के लिए संघर्ष की स्थिति भी पैदा हो जाती है। इस समस्या का मुख्य कारण बारिश के पानी का संचय नहीं होना है। इन्हीं वजहों से हर साल भूजल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। जबकि शहर की जनता से नगर निगम ने इसके लिए 1 करोड़ रुपए जमा करवाया है।

इसलिए है जरूरी
वाटर हार्वेस्टिंग बनाने से घरेलू काम के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी बचा सकते हैं। गर्मीयों के दिन वाटर हार्वेस्र्टिंग का उपयोग निस्तार, पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है। इससे घर के आसपास का तापमान भी कम होता है। ऐसी जगह में वर्षा के महीने में जल संचयन करना गर्मी के महीने में पानी की कमी को कुछ प्रतिशत तक कम कर सकता है। शहर में हर साल गिर रहे भूजल स्तर के लिए हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है।

गिनती भर के मकान में ही सिस्टम
शहर में भवन निर्माण के साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से बनवाए जाएं, लेकिन कहीं भी नव निर्मित भवनों में यह सिस्टम लगाए जाने की बात कोसों दूर हैं। जानकारी के मुताबिक शहर भर में लगभग 25 हजार मकान बने हुए हैं, लेकिन 95 फीसदी से अधिक मकानों में यह सिस्टम नहीं हैं। ऊंगलियों में गिनने लायक मात्र 55 से 60 मकानों में ही वाटर हार्वेस्टिंग बने हैं। योजना को लागू हुए 15 वर्ष से अधिक का समय गुजर गया है, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इस महत्वपूर्ण सिस्टम को लगू कराने क लिए सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है।

शहरी क्षेत्र में यह है नियम
भवन निर्माण की परमिशन देते वक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की शर्त रखी जाती है। इसके लिए नगर निगम में प्रत्येक स्क्वायर मीटर के 55 रुपए के हिसाब से अमानत राशि जमा कराई जाती है। जिसके बाद अनुमति देते हैं। निर्माणाधीन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाता है, तो वेरिफिकेशन के बाद अमानत राशि वापस होती है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में 1200 वर्गफीट व इससे ज्यादा साइज के मकान, दुकान, काम्प्लेक्स या अन्य बिल्डिंग पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। लेकिन यहां नगर में किसी भी निजी भवनों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए गए हैं।

जनता के एक करोड़ नगर निगम के पास जमा
न गर निगम के मुताबिक शहर में इस समय 25 हजार से अधिक छोटे-बड़े मकान हैं। इन मकानों में बरसात का पानी जमा करने हेतु वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रत्येक मकान मालिक ने नगर निगम में अमानत राशि जमा करवाई है। इस तरह शहर की जनता ने अब तक नगर निगम के पास 1 करोड़ रुपए राशि जमा करवा चुकी है। इस राशि के एवज में निगम को प्रत्येक मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाकर देना था। किन्तु सरकार के गाइड लाइन का पालन नहीं करते हुए जवाबदार इसकी लापरवाही लगातार कई सालों से कर रहे हैं। एेसे में हर साल शहर में होने वाली बरसात का पानी नालों के जरिए सीधे इंद्रावती में जाकर मिल रहा है। जिसकी वजह से शहर में भूजल स्तर नीचे गिर रहा है।

नगर निगम महापौर जतीन जायसवाल से 'पत्रिका' की सीधी बात

जवाब- वर्ष 2015 से इस ओर प्रयास जारी है। दिल्ली की एक एजेंसी शहर का मुआयना करने पहुंची थी, लेकिन अब तक एजेंसी से जवाब नहीं मिला है।