19 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

PM Kisan Scheme Update: बेमेतरा के 65 हजार से अधिक किसानों को नहीं मिला सम्मान निधि का लाभ, E-Kyc बनी बड़ी वजह

PM Kisan Bemetara News: कृषि विभाग के अनुसार ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और पंजीयन की धीमी प्रक्रिया इसके प्रमुख कारण हैं। जिले में पंजीयन का प्रतिशत दुर्ग संभाग में सबसे कम है।
2 min read
Google source verification
PM Kisan Scheme

65 हजार किसानो को नहीं मिला सम्मान निधि का लाभ (Photo Patrika)

PM Kisan Scheme: कृषि प्रधान बेमेतरा जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का लाभ अब भी बड़ी संख्या में पात्र किसानों तक नहीं पहुंच सका है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले के 65 हजार से अधिक किसान अभी भी योजना से वंचित हैं। पंजीयन के मामले में बेमेतरा दुर्ग संभाग के पांच जिलों में सबसे पीछे है। विभागीय प्रयासों के बावजूद पंजीयन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है।

1.29 लाख किसानों का पंजीयन

कृषि विभाग के अनुसार जिले में कुल 1,86,932 किसान दर्ज हैं। इनमें से करीब 1.29 लाख किसानों का योजना के तहत पंजीयन हुआ है, जबकि ई-केवाईसी और आधार सीडिंग की अनिवार्य प्रक्रिया केवल 1,21,805 किसानों की ही पूरी हो पाई है। इसका मतलब है कि 65,127 किसान अब भी योजना के लाभ से बाहर हैं। कुल किसानों के मुकाबले जिले में पंजीयन का प्रतिशत महज 64 फीसदी है, जो दुर्ग संभाग में सबसे कम है।

बेमेतरा सबसे निचले स्थान पर

संभाग के अन्य जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। कबीरधाम में 86 प्रतिशत किसानों का पंजीयन हो चुका है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत, जबकि दुर्ग और राजनांदगांव में 79 प्रतिशत है। ऐसे में कृषि प्रधान होने के बावजूद बेमेतरा का सबसे निचले स्थान पर होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। योजना की धीमी प्रगति के पीछे वर्ष 2019 से मार्च 2020 के दौरान हुई गड़बडिय़ों को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। उस समय राजस्व विभाग के माध्यम से किए गए पंजीयन में 89,195 अपात्र किसानों को करीब 100.46 करोड़ रुपए का भुगतान हो गया था। इसके बाद रिकवरी और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। अधिकारियों का मानना है कि इसी के बाद पंजीयन प्रक्रिया में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जिससे नए पात्र किसानों का पंजीयन भी प्रभावित हुआ है।

विभाग का पक्ष: जागरूकता से जोडऩे प्रयास

उपसंचालक कृषि मोरध्वज डरसेना ने बताया कि पिछले दो वर्षों में जिले में 18 हजार नए किसानों का पंजीयन किया गया है। वहीं पूर्व में अपात्र पाए गए 54 हजार किसानों के नाम सूची से हटाए गए हैं। विभाग लगातार ई-केवाईसी और आधार सीडिंग का कार्य करा रहा है। पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों और जागरूकता अभियान से शेष पात्र किसानों को भी योजना से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।

तकनीकी प्रक्रियाएं चुनौती

तकनीकी प्रक्रियाएं भी किसानों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और ऑनलाइन सत्यापन की अनिवार्यता के कारण कई किसान प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और तकनीकी जानकारी की कमी के चलते बड़ी संख्या में पात्र किसान अब भी योजना से नहीं जुड़ सके हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष छह हजार रुपए की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। ऐसे में हजारों पात्र किसानों का योजना से बाहर रहना चिंता का विषय माना जा रहा है।

बड़ी खबरें

View All

बेमेतरा

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग