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ऐसे में कैसे संवरेगा भारत का भविष्य : तीन स्कूल शिक्षकविहीन और 22 स्कूलों में मात्र एक टीचर

संकुल केंद्र बटार के 16 प्राथमिक व 6 पूर्व माध्यमिक शालाओं में से प्राथमिक शाला कुरदा, नेवासपुर, तर्के और पूर्व माध्यमिक शाला हेमाबंद शिक्षक विहीन हैं।
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बेमेतरा

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Rajkumar Bhatt

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Updated: 22 Jun 2018, 5:00 AM IST

Lock in school

Lock in school

बेमेतरा/दाढ़ी . सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता के लिए नए-नए उपाय किए जा रहे हैं। प्रत्येक एक किमी में प्राथमिक, तीन किमी में पूर्व माध्यमिक, 5 किमी में हाईस्कूल और 1 से 10 किमी में हायर सेकंडरी स्कूल संचालित किया जा रहा है, लेकिन शाला शिक्षक विहीन या एक शिक्षकीय हो तो ऐसे में गुणवत्तायुक्त शिक्षा की कल्पना करना व्यर्थ है,जिसका जीता-जागता प्रमाण बेमेतरा ब्लॉक का संकुल केंद्र बटार है।

किसी स्कूल में शिक्षक नहीं तो कहीं एक ही शिक्षक

संकुल केंद्र बटार के 16 प्राथमिक व 6 पूर्व माध्यमिक शालाओं में से प्राथमिक शाला कुरदा, नेवासपुर, तर्के और पूर्व माध्यमिक शाला हेमाबंद शिक्षक विहीन हैं। वहीं प्राथमिक शाला देवगांव, नवरंगपुर व भैंसबोडख़ुर्द एक शिक्षकीय हैं। ये स्कूल मात्र दाल-भात केंद्र बनकर रह गए हैं। शासकीय प्राथमिक शाला नवरंगपुर के प्रभारी प्रधानपाठक नैपाल सिंह चंद्राकर ने बताया कि सन् 2008 से यह स्कूल एक शिक्षकीय है। पिछले सत्र में व्यवस्था के तहत केवल 31 जुलाई से 20 अगस्त तक 20 दिन दूसरा शिक्षक आया था। उसके बाद से आज तक एक शिक्षकीय है। बच्चों को पढ़ाएं या कार्यालयीन कार्य करें, ऊपर से मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी। ऐसी स्थिति में बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

शिक्षकों की कमी से सभी वाकिफ

बटार संकुल के समन्वयक सोनलाल चंद्राकर ने बताया कि संकुल के 16 प्राथमिक शालाओं में 45 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 37 शिक्षक कार्यरत हैं और 8 पद रिक्त है। इसी तरह 6 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 25 पद स्वीकृत है, जिसमें 16 शिक्षक कार्यरत हैं और 9 पद रिक्त है। इस प्रकार संकुल में कुल 17 शिक्षकों की कमी है। इसकी पूरी जानकारी बीईओ को दे दी गई है। उन्हीं के निर्देशानुसार व्यवस्था किया जाना है।

मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों की छुट्टी

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गैंदलाल मोहिले, वकील कुमार रात्रे, शिवप्रसाद डिंडौरे, रामचरण रात्रे, शिवकुमार रात्रे, अमरदास गेंड्रे ने बताया कि 10 साल से यहां संचालित स्कूल एक शिक्षकीय है। जिसके कारण आवश्यक मीटिंग या कार्यालयीन कार्य से जाने पर स्कूल में मध्यान्ह भोजन के बाद छुट्टी दे दी जाती है। शिक्षक की मांग जनदर्शन में कर चुके हैं, लेकिन आज तक शिक्षक की व्यवस्था नहीं की गई है।

सरकारी स्कूलों की ओर ध्यान दे सरकार

जिला कांग्रेस सचिव शिशिर दुबे ने बताया कि सरकार केवल विकास यात्रा के माध्यम से विकास कार्यों का ढिंढोरा पीट रही है। शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। लेकिन सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए कि सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था के कारण शिक्षा का स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है। जिसके कारण निजी स्कूल कुकुरमुत्ता की तरह खुल गए हैं। सरकारी स्कूलों में कई साल से शिक्षकों की कमी है। ऐसे में यहां गुणवत्तायुक्त शिक्षा की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।

हरसंभव प्रयास
अरुण खरे, बीईओ, बेमेतरा ने बताया कि बेमेतरा ब्लॉक में 3 स्कूल शिक्षक विहीन और 22 स्कूल एक शिक्षकीय है। इन स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिले, इसके लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।