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Road Scam Chhattisgarh: 2 करोड़ की सड़क में बड़ा खेल, 6 महीने भी नहीं टिक सकी , 36 जगहों पर दरारें

Road Scam Chhattisgarh : 2 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क 6 महीने में ही उखड़ने लगी है। डामर की परत महज 1 इंच मिलने और 36 जगहों पर गहरी दरारें पड़ने पर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
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Chhattisgarh Road Damage

सड़क में 36 जगहों पर दरारें (Photo Patrika)

Chhattisgarh Road Damage news: ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा देने के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। डंगनिया-मटिया-पतोरा मार्ग इसका उदाहरण है। करीब दो करोड़ रुपए की लागत से बनी 2.05 किलोमीटर लंबी इस सडक़ पर निर्माण पूरा होने के छह महीने के भीतर ही 36 से अधिक स्थानों पर गहरी दरारें उभर आई हैं। ग्रामीणों ने निर्माण में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सडक़ की ऊपरी परत कमजोर होने के कारण यह समय से पहले खराब हो रही है। निर्माण संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, सडक़ का काम फरवरी 2026 में पूरा हुआ था।

गडऩे पर उखड़ रही सतह गुणवत्ता पर संदेह

शिकायत मिलने पर पत्रिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर सडक़ की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने कई स्थानों पर दरारें दिखाते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि कुछ जगहों पर सडक़ की सतह को रगडऩे से ही डामर और ऊपरी परत उखडऩे लगती है। ग्रामीणों के मुताबिक, लंबे इंतजार के बाद बनी सडक़ से बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही महीनों में इसकी हालत बिगडऩे लगी। उनका आरोप है कि शुरुआती दौर में ही शिकायतें की गई थीं, मगर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।

पहली बारिश में दिखने लगीं दरारें

ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ निर्माण के शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ। पहली बारिश के बाद जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगीं, जो अब गहरी होती जा रही हैं। आशंका है कि समय रहते मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो सडक़ का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है।

रगडऩे पर उखड़ रही सतह गुणवत्ता पर संदेह

शिकायत मिलने पर पत्रिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर सडक़ की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने कई स्थानों पर दरारें दिखाते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि कुछ जगहों पर सडक़ की सतह को रगडऩे से ही डामर और ऊपरी परत उखडऩे लगती है। ग्रामीणों के मुताबिक, लंबे इंतजार के बाद बनी सडक़ से बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही महीनों में इसकी हालत बिगडऩे लगी। उनका आरोप है कि शुरुआती दौर में ही शिकायतें की गई थीं, मगर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।

पाइप बिछाने के लिए खोदी गई जगह पर खुली परत

पड़ताल के दौरान ग्रामीण टीम को उस स्थान पर लेकर पहुंचे, जहां खेत तक पानी पहुंचाने के लिए एक किसान ने सडक़ खोदकर पाइप बिछाया था। यहां सडक़ की परत खुली हुई थी। मौके पर दिखाई दे रही डामरयुक्त परत की मोटाई लगभग एक इंच मापी गई। हालांकि, यह माप सडक़ की पूरी संरचना की मोटाई या तकनीकी मानकों के उल्लंघन का निर्णायक प्रमाण नहीं है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर सडक़ की परतों की तकनीकी जांच और निर्माण संबंधी अभिलेखों का परीक्षण जरूरी है।

स्वीकृत डिजाइन के मुताबिक हुआ काम?

सडक़ की मजबूती केवल डामर की ऊपरी परत पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए नीचे की आधार परत, सामग्री की गुणवत्ता, बाइंडर और निर्धारित तकनीकी डिजाइन के अनुरूप निर्माण भी महत्वपूर्ण है। सडक़ की श्रेणी और यातायात के दबाव के अनुसार परतों की मोटाई तय होती है। ऐसे में डंगनिया-मटिया-पतोरा मार्ग पर स्वीकृत डिजाइन अनुसार निर्माण हुआ या नहीं, जांच जरूरी है। परीक्षण से ही स्पष्ट होगा, समय से पहले क्यों खराब होने लगी।

सडक़ का मौका निरीक्षण करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। पदमी-भुरकी सडक़ का भी निरीक्षण किया जाएगा।
केपी लहरे, कार्यपालन अभियंता, पीडब्ल्यूडी