
Officials took a meeting after reaching submerged villages
बैतूल। गढ़ा डैम बनाए जाने को लेकर डूब क्षेत्र के किसानों द्वारा किए जा रहे उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद सोमवार को प्रशासन दो गु्रपों में बटकर डूब प्रभावित अलग-अलग गांवों में किसानों के बीच पहुंचा। अधिकारियों ने किसानों से आंदोलन, चक्काजाम और हिंसक प्रदर्शन जैसी गतिविधियां नहीं करने की अपील की। विभाग का कहना था कि तकनीकी दृष्टि से बैराज बनाया जाना संभव नहीं है। चार गुना मुआवजा दिया जाना भी शासन स्तर का काम है।इसमें विभाग कुछ नहीं कर सकता है। अधिकारियों ने किसानों को डैम बनने से होने वाले फायदे भी गिनाए। किसानों को बताया गया कि डैम से सिंचाई के लिए पहली बार पानी छोड़े जाने पर ३० प्रतिशत, दूसरे पानी में ३० प्रतिशत और तीसरे पानी में ३० प्रतिशत यानि ९० प्रतिशत जमीन खेती के लिए खाली हो जाएगी, जिस पर किसानों का अधिपत्य होगा। डूब क्षेत्र में महज १० प्रतिशत जमीन ही आएगी। इसमें भी ५ प्रतिशत सरकारी और ५ प्रतिशत जमीन किसानों की होगी। इसलिए किसान डूब क्षेत्र की जमीन में भी फसल ले सकेंगे। जो पहले से अधिक उपजाऊ जमीन होगी।
पांच गांवों में पहुंची अधिकारियों की टीम
अधिकारियों की दो अलग-अलग टीमें डूब प्रभावित पांच गांवों में भ्रमण के लिए पहुंची थी। पहली टीम में एसडीएम, एसडीओ, नायब तहसीलदार, विभाग के उपयंत्री शामिल थे। जो कोदारोटी, हिवरखेड़ी, मंडईबुजुर्ग में किसानों के बीच पहुंचे थे। इसी प्रकार जलसंसाधन विभाग के ईई एके देहरिया, एसडीओ विपिन वामनकर सहित अन्य पाढर एवं डोकिया पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें गढ़ा परियोजना के फायदे गिनाए। ड्रिप एरिगेशन तकनीक से सिंचाई के फायदे बताए। अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई के लिए तीन पानी देने के बाद १० प्रतिशत ही पानी डैम में बचेगा। जिससे डूब की जमीन भी बाहर आ जाएगी। इसका फायदा किसान फसल उगाने के लिए ले सकेंगे।अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि वे डैम निर्माण में किसान प्रकार का अवरोध उत्पन्न न करें और न ही धरना प्रदर्शन, चक्काजाम एवं हिंसक प्रदर्शन जैसी गतिविधियां करें। शांतिपूर्ण ढंग से डैम का निर्माण पूरा करने दिया जाए। क्योंकि आगे चलकर डैम का फायदा आप सभी ग्रामीणों को ही मिलेगा। इधर डूब क्षेत्र के कृषक यतीेंद्र सोनी ने बताया कि डूब क्षेत्र के किसानों पर पुलिस द्वारा जो कार्रवाई की गई है इसे वापस लेने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों द्वारा गेहूं की फसल लगे रहने के दौरान ही सर्वे कार्य किया जा रहा है। फसल कटाई के बाद सर्वे कराए जाने की बात किसानों ने कहीं है।
Published on:
10 Mar 2020 05:03 am
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