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नजर अंदाज किये जाने से छलका BJP के दलित पूर्व विधायक का दर्द, बोले मुझे नहीं लगता पार्टी कोई महत्वपूर्ण पद देगी

भाजपा के एक पूर्व दलित विधायक ने पार्टी में नजर अंदाज किये जाने का उठाया मुद्ददा, दो बार रह चुके हैं विधायक।
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भदोही

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Mohd Rafatuddin Faridi

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Updated: 14 Apr 2018, 6:18 PM IST

BJP Leader Purnmasi Pankaj

भाजपा नेता पूर्णमासी पंकज

भदोही. दलित मोर्चे पर बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। चार दलित सांसदों और दो विधायकों के मोर्चा खोलने के बाद अब दो बार के पूर्व विधायक व बीजेपी के दलित नेता ने अपनी पार्टी पर उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्हें इस बात की तकलीफ है कि दो बार विधायक रहने के बावजूद पार्टी उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद के लायक नहीं समझती। विधानसभा चुनाव में भी उन्हें दरकिनार कर आयातित नेता को टिकट दिया गया। हालांकि अभी उन्होंने कोई बागी तेवर नहीं दिखाए हैं और खुद को फिलहाल भाजपा का सच्चा कार्यकर्ता ही बता रहे हैं।


देश के सियासी हलके में दलितों के लेकर मचे दंगल के बाद भाजपा के कुछ दलित सांसद व विधायक ही नहीं पार्टी के प्रति समर्पित कहे जाने वाले दलित नेताओं में भी काफी असंतोष सामने आ चुका है। इस कड़ी में भदोही से दो बार विधायक रहे बीजेपी के दलित नेता पूर्णमासी पंकज का नाम भी जुड़ गया है। बाल स्‍वयं सेवक से लेकर दो बार भाजपा से विधायक पद का सफर तय करने वाले पीएचडी डिग्री धारक पूर्णमासी पंकज को वर्तमान में पार्टी और सरकार में तरजीह नहीं दी जा रही है।

इस बारे में डॉ. पूर्णमासी पंकज का कहना है कि पार्टी और सरकार के पास पर तो बहुत हैं लेकिन इस बारे में उनका ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है । लेकिन इसके बावजूद भी वो पार्टी के प्रति स‍मर्पित थे और आगे भी रहेंगे लेकिन पार्टी को अपने और बाहरी नेताओं में फर्क समझना होगा। पूर्व विधायक पंकज का पैतृक गांव ज़िले के दुर्गागंज़ के गदौर गडोरा गाँव में है। पेशे से शिक्षक रहे हैं। जब पहली बार विधायक चुने गए तो शिक्षक थे। वह पीएचडी भी हैं। उनकी छवि एक ईमानदार विधायक के रुप में रही।


1991 में पहली बार भदोही से विधायक चुने गए। बाद में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में दिसम्बर 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद सरकार चली गई। लेकिन 1993 में सपा- बसपा के गठबंधन में हार का सामना करना पड़ा। 1996 में दूसरी बार भदोही सुरक्षित से चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज़ की। भदोही की जनता में वे बेहद लोकप्रिय रहे। लेकिन पार्टी की उपेक्षा से बेहद दुःखी हैं। बोले, पार्टी दलित और अनुसूचित जाति पर अधिक ध्यान दे रही है। लेकिन उसी जाति से होने के बाद मेरी उपेक्षा की गई।


2017 के विधानसभ्रा चुनाव चुनाव में मुझे पार्टी ने टिकट नहीं दिया। औराई सुरक्षित सीट पर दूसरे दल से आए एक पूर्व विधायक को गले लगा लिया गया, लेकिन मेरी सेवा को ताक पर रख दी गयीं। भाजपा में आयातित लोगों की मांग से पार्टी और संघ के निष्ठावान कार्यकर्ताओ को किनारे रखने की नीति घातक है। उनका कहना है कि संघ और पार्टी का सिपाही रहा हूँ और रहूंगा।


पूर्व विधायक के पास आज़ भी फोर व्हीलर की गाड़ी नहीं हैं। अभी तक वह वेस्पा स्कूटर से चलते आ रहे थे। दो साल पूर्व एक बाइक ली है। इनकी पहचान स्कूटर वाले विधायक के रुप में रही है। देश में दलितों को लेकर चल रहे दंगल पर पूर्णमासी पंकज कहते हैं कि यह सपा-बसपा की राजनीति है और इससे भाजपा के सेहत पर असर नहीं पड़ने वाला है। भाजपा मे जो भी दलित हैं वो पार्टी के प्रति समर्पित हैं। भाजपा में रहने वाले दलित सत्‍ता के लालच में पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों में नहीं जाते हैं।
by Mahesh Jaiswal