
माता दुर्गा - Image AI Grok
Navratri Day 4 : नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को समर्पित है। उन्हें आदिशक्ति कहा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने ही सृष्टि की रचना की। पहले केवल गहन अंधकार व्याप्त था और किसी भी चीज का कोई अस्तित्व नहीं था। मां कूष्मांडा ने स्मित हास्य के साथ ब्रह्मांड की रचना की। कु+उष्मा+अंडा अर्थात त्रिविध तापयुक्त ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली होने से देवी को 'कूष्मांडा' कहा गया है। वे अपने भक्तों की आयु, यश में वृद्धि करती हैं।
ऐसे करें पूजा
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि सुबह जल्दी उठकर स्नान कर हरा, नारंगी या लाल रंग के वस्त्र पहन लें। घर के पूजा स्थल की शुद्धि कर चौकी पर कूष्मांडा माता को स्थापित कर देशी घी का दीप प्रज्वलित करें। मां को लाल फूल चढ़ाएं और सुहाग का सामान अर्पित करें। कूष्मांडा माता को मालपुए का भोग लगाना चाहिए। उनके मंत्रों का जाप करें और सबसे अंत में आरती करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कूष्मांडा माता को कुम्हड़े की बलि दी जाती है। कुम्हड़े को संस्कृत में कुष्मांड कहते हैं जिससे देवी का यह नामकरण हुआ।
कूष्मांडा माता सूर्यमंडल के अंतर्लोक में निवास करती हैं। सूर्यलोक में रह पाने की क्षमता केवल इन्हीं देवी में है। पूरे ब्रह्मांड में मां कूष्मांडा का ही तेज व्याप्त है। उनका शरीर भी सूर्य के समान ही कांतिमान है। माता कूष्मांडा अपने भक्तों की आयु, यश और स्वास्थ्य में वृद्धि करती हैं। उनकी आस्थापूर्वक की गई आराधना का फल सभी प्रकार के रोग, शोक, कष्ट दूर हो जाने के रूप में प्राप्त होता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने ही सृष्टि बनाई। वे अष्टभुजाधारी हैं। मां कूष्मांडा का स्वर्णिम स्वरूप है। उनकी 8 भुजाओं में चक्र, कमंडल, धनुष, बाण, गदा और जपमाला के साथ ही कमल का फूल और अमृत कलश भी है। वे सिद्धि व निधि देने वाली देवी हैं।
सरल मंत्र:
ॐ कूष्माण्डायै नमः
बीज मंत्र:
ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः
प्रार्थना मंत्र:
सुरासम्पूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥
ध्यान मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Updated on:
13 Oct 2026 05:58 pm
Published on:
13 Oct 2026 05:54 pm
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