
शनि का गोचर - फोटो सोर्स- Chatgpt
Saturn In Revati : वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्मफलदाता और न्याय का कारक माना गया है। प्राय: लोग उनसे डरते हैं पर हकीकत बिल्कुल अलग है। शनिदेव कर्मानुसार अच्छा फल भी देते हैं। कुंडली में उनकी स्थिति के अनुसार जातक को शुभ या अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। शनि का गोचर भी खासा प्रभावी होता है। यही कारण है कि उनके नक्षत्र परिवर्तन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिदेव ने 20 अगस्त को रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश कर लिया है। रेवती नक्षत्र का स्वामी बुध है जोकि शनि के मित्र हैं। वे 9 अक्टूबर 2026 तक रेवती के पहले पद में रहेंगे। शनि की यह स्थिति कुछ जातकों के लिए जिंदगी में उथल पुथल लेकर आ सकती है। इससे बचने के लिए पूजा पाठ सहित कुछ साधारण उपाय जरूर करना चाहिए।
द्रिक पंचांग के अनुसार 20 अगस्त को शनिदेव ने नक्षत्र परिवर्तन कर लिया है। वे बुध के नक्षत्र रेवती के प्रथम पद में जा चुके हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि शनि का यह गोचर कुछ लोगों के लिए कठिन साबित हो सकता है।
रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और संवाद के कारक हैं। बुध जहां चंचल ग्रह माने जाते हैं वहीं शनि को स्थिरता का कारक कहा जाता है। शनि और बुध ग्रह में जहां स्वभावगत अनेक भिन्नताएं हैं वहीं दोनों में परस्पर मित्रता भी है। ऐसे में रेवती नक्षत्र में शनि के जाने से कुछ लोगों को करियर, सेहत और पैसों के मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 9 अक्टूबर 2026 तक यह स्थिति रह सकती है। ऐसे में शनि के प्रकोप से बचने के लिए सावधान रहने और पूजा पाठ करने की आवश्यकता है।
जिनकी कुंडली में शनि और बुध नीच राशि में हैं, कमजोर हैं या अकारक हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी। न्याय के देवता का यह गोचर ऐसे लोगों को खासा प्रभावित कर सकता है। मानसिक तनाव हो सकता है, अनावश्यक खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे बजट बिगड़ सकता है। कमजोर शनि वाले लोगों को इस अवधि में पैसों के मामले में सावधान रहते हुए बड़े निवेश से बचना चाहिए।
Updated on:
21 Aug 2026 01:52 pm
Published on:
21 Aug 2026 01:33 pm
