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लोग उलाहना देते थे महिला है क्या करेगी, खुद दुकान खोली और बनाया मकान

-पहाड़ी के गांव सतवाड़ी की महिला प्रेमवती की कहानी
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भरतपुर

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Meghshyam Parashar

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Updated: 21 Oct 2020, 10:54 AM IST

लोग उलाहना देते थे महिला है क्या करेगी, खुद दुकान खोली और बनाया मकान

लोग उलाहना देते थे महिला है क्या करेगी, खुद दुकान खोली और बनाया मकान

भरतपुर. तहसील के दूर दराज के सतवाड़ी गांव में रहने वाली प्रेमवती ने परिवार के पालन पोषण के लिए एक संस्था के आर्थिक सहयोग से करीब आठ वर्ष पहले सौन्दर्य प्रसाधन विक्रय की दुकान खोलकर पूरी लगन व मेहनत से संचालन किया तो उसे प्राप्त आर्थिक लाभ से उसने कच्चे मकान के स्थान पर पक्का मकान बनवा लिया और अब खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही है। महिला ने बताया कि पहले लोग उलाहना देते थे कि यह महिला होकर क्या दुकान चला पाएगी, लेकिन अब वो ही लोग उसकी हिम्मत की दाद देते हैं।
प्रेमवती की खुशहाली की कहानी अधिक पुरानी नहीं है। प्रेमवती ने शादी के बाद ससुराल में आकर देखा तो पूरा परिवार मेहनत मजदूरी कर जीवनयापन कर रहा है। ऐसी स्थिति में प्रेमवती के मन में कोई अपना स्वरोजगार का कार्य संचालित करने का मन आवश्य था लेकिन उसके पास इतनी राशि नहीं थी कि वह अपना रोजगार शुरू कर सके। प्रेमवती ने अपनी इस समस्या की जानकारी लुपिन फाउंडेशन के ब्लॉक समन्वयक को दी। जिस पर संस्था से प्रेमवती को सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री विक्रय के लिए आसान किस्तों पर 25 हजार रुपए का ऋण दिया। इस ऋण से प्रेमवती ने हरियाणा के गुडगांवा से सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री खरीदकर घर में ही दुकान संचालित की। पूरी लगन एवं मेहनत के साथ सामग्री का विक्रय करने लगी और साथ ही घर का काम-काज भी करती। प्रेमवती की मेहनत रंग लाई और लिए गए ऋण को समय पर वापस कर दिया तथा स्वयं के पास भी करीब 25 हजार रुपए की बचत हो गई। सामग्री विक्रय का कारोबार इतना बढ़ गया कि उसे अधिक सामान लाने की जरुरत महसूस होने लगी। जिस पर उसने पुन: ऋण लेकर प्रसाधन सामग्री के अलावा जूते-चप्पल बेचने का काम भी शुरू किया। प्रेमवती के परिवार में हुई आमदनी को देखते हुए उसका पति भी सहयोग करने लगा। इससे सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री विक्रय का कारोबार निरन्तर बढ़ता चला गया। परिवार में हुई आय के कारण उसने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना प्रारंभ किया और पक्का मकान भी बनवा लिया।

अन्य महिलाएं भी हुई प्रेरित

प्रेमवती के जीवन में सौन्दर्य प्रसाधन सामग्री विक्रय से हुए परिवर्तन को देखकर गांव की अन्य महिलाओं ने भी तुलसी माला निर्माण, सब्जी विक्रय व जनरल स्टोर सहित अन्य आय देने वाले कार्य शुरू किए हैं। उसने बताया कि अगर मन में ठान लिया जाए तो जीवन में कुछ भी करना असंभव नहीं है, लेकिन आत्मविश्वास बहुत आवश्यक है।