
पॉजिटिव सोच: एक पेड़ के सहारे जिंदगी बचाने का जुनून, सांसें हो रही कम इसलिए हजारों पौधे रोप दिए शहर की हर गली में
दाक्षी साहू @भिलाई. कोरोना महामारी की दूसरी लहर पूरे देश में कहर बरपा रही है। टूटती सांसों को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत ऑक्सीजन (Oxygen) की है। भिलाई में कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने इस प्राणवायु की कीमत आज नहीं बल्कि कई साल पहले ही समझ ली थी। जब हम अपने परिवार के साथ घूमने-फिरने और मौज-मस्ती में व्यस्त थे, तब ये लोग शहर के हर गली-मोहल्ले और खाली जमीन में नन्हें पौधे रोप रहे थे, ताकि आने वाली पीढ़ी को दूषित हवा के कारण बीमार जिंदगी न जीना पड़े। आज ऐसे ही दो पर्यावरण मित्रों की कहानी आपसे साझा कर रहे हैं जो संकटकाल में आपके लिए हर रोज एक पौधा लगा रहे हैं।
हर महीने अपनी कमाई का 30 फीसदी खर्च करते हैं पौधे लगाने में
एक पेड़ के सहारे एक जिंदगी बचाने का जुनून सिर पर लिए बीएसपी कर्मचारी बालू राम वर्मा लौह नगरी भिलाई में हर ओर हरियाली की चादर बिछाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है, लोग पर्यावरण का महत्व समझकर कम से कम एक पेड़ अपने आंगन में जरूर लगाएंगे। 35 वर्ष पहले पौधे लगाने की अनूठी मुहिम में एल पॉकेट मरोदा सेक्टर निवासी बालू राम अकेले थे, पर समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई। आज भिलाई में लगाए उनके पांच हजार से ज्यादा पौधे, विशाल पेड़ों का आकार ले चुके हैं। टाउनशिप सहित पूरे शहर में 25 समूहों को उन्होंने 365 दिन लगाए पौधों के सरंक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। हर महीने अपनी कमाई का 30 फीसदी हिस्सा पौधे लगाने और उन्हें बचाने में खर्च करते हैं। ताकि स्वस्थ धरती, प्रकृति, पर्यावरण, शहर, परिवार और सुखद भविष्य के साथ लोग जी सके।
नौ एकड़ के बंजर श्मशान घाट में लगा दिए दो हजार से ज्यादा पेड़
आज से छह साल पहले बस्तर में हुए माओवादी हमले में शहीद जवान किरण देशमुख की चिता ने दिल ऐसी आग लगाई की भिलाई नगर निगम के पूर्व पार्षद चुम्मन देशमुख ने 9 एकड़ के बंजर श्मशान घाट में हरियाली की चादर बिछा दी। रिसाली बस्ती के जिस श्मशान घाट में कभी एक झाड़ी भी देखने को नसीब नहीं होती थी वहां पूर्व पार्षद ने दो हजार से ज्यादा पौधे लगाकर उसे सुंदर बागीचा बना दिया है।
जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार के लिए रोपते हैं एक पौधा
पर्यावरण पहरी बनकर चुम्मन जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार, हर सुख-दु:ख में लोगों को जोड़कर उनसे एक पौधा लगवाते हैं। वे कहते हैं श्मशान घाट में हर रोज एक सांस रूकते ही इंसानी शरीर पंचतत्व में विलीन होता है। दूसरी ओर हजारों जीवित लोगों की सांसें बनकर एक नन्हा पौधा धरती की गोद में रोपा जाता है। इसलिए पौधे लगाने के साथ उसका संरक्षण भी जरूरी है। अपने साथ कई युवाओं को जोड़कर अब वे लोगों को नि:शुल्क पौधे भी बांटते हैं। ताकि बदलते समय और चुनौतियां के बीच कम से कम प्राणवायु देने वाले इन पेड़ों की अहमियत लोग समझे।
Published on:
28 Apr 2021 12:39 pm
