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PM E-Bus Bhilai: अच्छी खबर: दुर्ग-भिलाई को मिलेंगी 50 ई-बसें, संचालन एजेंसी के लिए संविदा सूचना जारी

PM E-Bus Scheme 2026: भिलाई-दुर्ग के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत शहर में जल्द ही 50 ई-बसें का संचालन शुरू होने जा रहा है।
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Pradhan Mantri E-Bus Sewa Yojana Bhilai

50 इलेक्ट्रिक बसें जल्द उतरेंगी सड़कों पर (फोटो सोर्स- पत्रिका)

PM E-Bus Bhilai: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की शुरुआत भिलाई से करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। बसों के चार्जिंग स्टेशन तक बिजली पहुंचाने के लिए रेलवे ट्रैक के नीचे से बिजली लाइन क्रॉस करने की अनुमति का इंतजार था, जो अब मिल गई है। सीएसपीडीसीएल पहले ही बिजली पोल और तार बिछाने का काम कर चुका है। रेलवे से अनुमति मिलने के बाद ई-बस सेवा शुरू करने की प्रमुख तकनीकी बाधा दूर हो गई है।

दुर्ग-भिलाई को मिलेंगी 50 ई-बसें

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत दुर्ग-भिलाई के लिए 50 मीडियम ई-बस स्वीकृत हैं। प्रदेश में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा को योजना में शामिल किया गया है। सेवा शुरू होने से रोजाना शहर में आवागमन करने वाले विद्यार्थियों, नौकरीपेशा युवाओं और अन्य यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, यह सेवा किफायती और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

कोरबा में 40 बसों

40 बसों के लिए दर्री के प्रतीक्षा बस स्टैंड में चार्जिंग सब-स्टेशन और टर्मिनल का काम तेजी से चल रहा है। स्थानीय निकाय के अनुसार तैयारी करीब 80 फीसदी तक पहुंची है और 20 मार्गों का रूट चार्ट तैयार किया गया है।

संचालन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी

शासन से अनुमति मिलने के बाद दुर्ग जिला अर्बन सोसायटी को संविदा सूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत ई-बसों के रूट, संचालन अवधि, चालक-परिचालक की व्यवस्था, बसों के रखरखाव, प्रतिकिलोमीटर भुगतान, टेंडर की शर्तें और पात्रता समेत अन्य प्रक्रियाएं तय की जाएंगी। नेहरू नगर के आगे ई-बस स्टैंड तैयार हो चुका है और चार्जिंग व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।

रेलवे से मिली अनुमति

सुरुचि सिंह, आयुक्त, नगर निगम भिलाई के मुताबिक, रेलवे ट्रैक से बिजली तार क्रॉस करने के लिए सीएसपीडीसीएल को अनुमति मिल गई है। संचालन करने वाली सोसायटी को संविदा सूचना भी जारी कर दी गई है।

बस डिपो हैंडओवर करने के बाद मिलेंगी बसें

केंद्र के दिशा-निर्देशों के मुताबिक बसों की डिलीवरी डिपो हैंडओवर के बाद चरणबद्ध होती है और 100 फीसदी डिलीवरी का टेंटेटिव टाइम 30 सप्ताह तक है। यानी छत्तीसगढ़ में अब अगली निर्णायक कड़ी डिपो हैंडओवर, अनुबंध और बसों की वास्तविक डिलीवरी है।