
मुकेश देशमुख/दुर्ग. परिवहन विभाग में उगाही का नया खेल शुरू हो गया है। परचून की दुकान की तर्ज पर सादे कागज में चालान की पर्ची वाहन मालिकों को थमाई जा रही है। मामले का खुलासा होने पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस तरह की उगाही से न केवल खुद को अंजान बता रहे हैं बल्कि पर्ची में जिसके हस्ताक्षर है उस नाम का कोई अधिकारी न होने की बात कह रहे हैं। अब सवाल उठता है कि आरटीओ के नाम पर फिर कौन सादी पर्ची पर चालान काट रहा है? जबकि ओवरलोड और फिटनेस जांच के नाम पर जमकर वसूली की जा रही है। यह विभाग की सील मुहर वाली अधिकृत रसीद नहीं है। इससे साफ है कि चालानी की यह राशि शासन के खजाने में जमा नहीं होगी। यह अधिकारियों की
जेब भरेगा।
वसूली करने वाला विभाग से ही कोई
पत्रिका के पास चालानी पर्ची (सादे कागज) है। जिसमें आरटीओ विभाग के किसी अधिकारी रमेश शर्मा का हस्ताक्षर हंै। चालान १५०० रुपए का है। सादे कागज में ब्लू डाटपेन से वाहन का नंबर लिखा गया है। संबंधित वाहन की सही में फिटनेस जांच नहीं हुई है। नंबर एक ट्रक का है। आठ टन क्षमता वाले इस ट्रक क ा फिटनेस २००८ में पहली बार हुआ था। इसके बाद फिटनेस जांच २०१६ में होना था, लेकिन ट्रक का आज तक फिटनेस जांच नहीं कराया गया। फिटनेस जांच न होने के कारण ही वाहन पर १५०० रुपए वसूला गया है। ट्रक की खामियों को ब्यौरा साबित करता है कि वसूली करने वाला विभाग से ही कोई है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति कर फाइल बंद
खुलासा होने के बाद अघोषित आफिस का बंद किया गया और तत्कालीन निरीक्षक को यहां से हटाया गया। उसके बाद जांच के नाम पर खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी गई। हैवी वीकल जांच के लिए जिले में गठित उडऩ दस्ता हमेशा विवाद में रहा है। अवैध रुप से निजी मकान को किराए से लेकर कार्यालय संचालित करने से लेकर वाट्स एप गु्रप बनाकर उगाही पहले ही सार्वजनिक हो चुका है। टोकन सिस्टम से भी लंबे समय से उगाही की जाती रही है।
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Published on:
24 Feb 2018, 11:20 AM IST
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