8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हनुमान जयंती पर आकर्षक चोलो से सजाया प्रतिमाओं को

कोविड-19 के चलते नहीं हुए सामूहिक कार्यक्रममंदिरों में दूर से ही दर्शन कर लौटे श्रद्धालु
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Suresh Jain

•

Updated: 27 Apr 2021, 9:59 PM IST

हनुमान जयंती पर आकर्षक चोलो से सजाया प्रतिमाओं को

हनुमान जयंती पर आकर्षक चोलो से सजाया प्रतिमाओं को

भीलवाड़ा।
कोरोना संक्रमण के चलते इस बार भी हनुमान जयन्ती सादगी के साथ मनाई गई। मदिरों में कोई सामूहिक आयोजन नहीं हुए तो आरती में भी पांच-छह जनो से अधिक लोगों को मंदिर में प्रवेश तक नहीं दिया गया। आरती के दौरान जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर की गूंज इस बार भक्तो के मुख से मंदिरों में सुनाई नहीं दी। हनुमान जयंती पर मंगलवार को विशेष रूप से हनुमान जी की प्रतिमाओं को आकर्षक चोला चढ़ाकर मंदिर का श्रृंगार किया गया। भक्तों ने दूर से ही हनुमान जी के दर्शन कर सुख शांति व देश को कोरोना मुक्त करने की कामना की।
संकट मोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबुगिरी महाराज ने बताया कि इस बार हनुमान जयन्ती के मौके पर २५ सौ क्विंटल काजू कतली का भोग नहीं लगाया गया है। लेकिन मिल्क केक काटकर हमुमान जी का जन्म दिवस मनाया गया। वही प्रतिमा पर विशेष चोला चढ़ाया गया। मंदिर को सजाया गया। बाहर से ही लोगों ने दर्शन किए।
बालाजी मार्केट स्थित पेंच के बालाजी मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा सहित राम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया। हनुमान जी को आम, मिठाई, तरबूज सहित अन्य फलों का भोग लगाया गया। मंदिर के महंत पंडित आशुतोष शर्मा ने बताया कि कोविड-19 गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए भक्तों को दर्शन करवाए गए। शहर के अन्य मंदिरों में भी कोविड-19 गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए सूक्षम रुप में हनुमान जयंती महोत्सव मनाया गया। मंदिरों में भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचे और दूर से ही 2 गज दूरी का पालना करते हुए दर्शन कर पुन: अपने घर लौटे। अधिकांश लोगों ने घरों में ही पूजा पाठ कर हनुमान जयंती मनाई। कई घरों में लोगों ने सहपरिवार हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इसके अलावा पंचमुखी हनुमान मंदिर, टंकी के बालाजी, पूरणदासजी की बगीची, क्वारा का हनुमानजी समेत अन्य हनुमान मंदिर में दोपाहर १२ बजे आरती की गई।