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भीलवाड़ा के छह विधायक, मांगे सत्ता में हक

Rajasthan election 2023 भीलवाड़ा-शाहपुरा की सात सीटों पर वोटरों ने भाजपा की झोली भर दी। सत्ता में लौट रही भाजपा को छह विधायक दिए। अब भीलवाड़ा की जनता को सत्ता में हिस्सेदारी का इंतजार है।
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भीलवाड़ा

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Narendra Kumar Verma

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Updated: 6 Dec 2023, 8:32 PM IST

भीलवाड़ा-शाहपुरा

भीलवाड़ा-शाहपुरा

भीलवाड़ा के छह विधायक

भीलवाड़ा-शाहपुरा की सात सीटों पर वोटरों ने भाजपा की झोली भर दी। सत्ता में लौट रही भाजपा को छह विधायक दिए। अब भीलवाड़ा की जनता को सत्ता में हिस्सेदारी का इंतजार है।

राज्य में सरकार गठन में भीलवाड़ा काे कितना प्रतिनिधित्व मिलेगा, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो रही है। जिले के लोग नई सरकार में अपने नुमाइंदों को जगह चाह रहे हैं। इस बार जनता ने भाजपा टिकट पर तीन नए और तीन पुराने चेहरे विधानसभा भेजे हैं।

तीन पहली बार, तीन दोबारा
सहाड़ा से लादूलाल पितलिया, मांडल से उदयलाल भडाणा व शाहपुरा से लालाराम बैरवा पहली बार तो मांडलगढ़ से गोपाल खंडेलवाल, आसींद से जब्बरसिंह सांखला व जहाजपुर से गोपीचंद मीणा दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। इन छह विधायकों में से किसे मंत्री बनाया जाएगा, इसे लेकर गली-मोहल्लों में चर्चाएं जोर पकड़ने लगी है।

रिकार्ड मतों से जीत, मंत्री को मात
सहाड़ा से पितलिया रिकॉर्ड मतों से जीते हैं। उन्होंने कांग्रेस के राजेन्द्र त्रिवेदी को 62,519 मत से मात दी, जो जिले में सबसे बड़ी जीत है। पितलिया जैन समाज से आते हैं। मांडल से उदयलाल भडाणा ने राजस्व मंत्री रामलाल जाट को बड़े अंतर से पटकनी दी। भडाणा गुर्जर समाज से आते हैं। राजस्थान में मांडल हॉट सीट में शुमार थी। यहां कांग्रेस टिकट पर कैबिनेट मंत्री रामलाल के होने से पूरे प्रदेश की नजरें टिकी थी।

मेघवाल को नम्बर तीन पर धकेला
शाहपुरा से लालाराम बैरवा ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने यहां निर्दलीय के रूप में उतरे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल को तीसरे नम्बर पर धकेल दिया। मांडलगढ़ से खंडेलवाल, आसींद से सांखला और जहाजपुर से मीणा दूसरी बार विधायक बने हैं।

सत्ता में मांडल का दबदबा
पिछले चार चुनाव में जिसकी सरकार बनी, उसमें भीलवाड़ा को हिस्सेदारी मिली। वर्ष-2003 में भाजपा सरकार में कालूलाल गुर्जर मंत्री तो वर्ष-2013 में मुख्य सचेतक रहे। वहीं वर्ष-2008 व 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने पर मांडल से जीते रामलाल मंत्री बने। यानी चारों बार मांडल से चुने गए विधायक को सत्ता में हिस्सेदारी मिली। जिले के अन्य क्षेत्र 20 साल से वंचित हैं। निवर्तमान कांग्रेस सरकार में धीरज गुर्जर को राजस्थान बीज निगम का अध्यक्ष बनाया गया।