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भीलवाड़ा: मांडल-ब्यावर हाइवे बना मौत का ‘डेमो’, निर्माण कार्य के दौरान अनदेखी और विकट मोड़ों से बढ़ रहे हादसे

मांडल को भीलवाड़ा से जोड़ने के लिए बनाया गया ओवरब्रिज कोढ में खाज का काम कर रहा है। इस ब्रिज की चौड़ाई कम होने और वाहनों का दबाव अधिक होने से हर समय हादसे की आशंका रहती है।

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Bhilwara Mandal-Beawar highway

Bhilwara Mandal-Beawar highway (Patrika Photo)

भीलवाड़ा (मांडल): ब्यावर-भीलवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर मांडल के पास बना तिराहा तकनीकी खामी के चलते दुर्घटना का सबब बना हुआ है। इसके चलते जहां आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं, वाहनों का जाम लगना भी आम हो गया है।


ऐसे में मांडल को भीलवाड़ा से जोड़ने के लिए बनाया गया ओवरब्रिज कोढ में खाज का काम कर रहा है। इस ब्रिज की चौड़ाई कम होने व वाहनों का दबाव अधिक होने से हर समय हादसे की आशंका रहती है।


मांडल कस्बे से जुड़ा बाइपास सर्किल तीन दिशाओं में जा रहा है। एक राह ब्यावर हाइवे से जुड़ी है। जबकि दो रास्ते मांडल कस्बे व आरोबी से जुड़े हुए हैं। लेकिन चौराहा की मुख्य धुरी मांडल बाइपास तकनीकी खामियों में उलझा हुआ है।


ये रही तकनीकी खामियां


जानकार बताते हैं कि पर्याप्त भूमि होने के बावजूद भी मांडल कस्बे को जोड़ते हुए अंदर की तरफ जाने वाले ओवरब्रिज से मार्ग को छोटा बनाया गया है। जबकि मांडल सर्किल के पास पूर्व में गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्से को यूं ही छोड़ दिया। वहीं, भीलवाड़ा जाने के लिए मुड़ाव पर ढलान दे दिया। इससे भारी भरकम वाहनों को घुमाव में परेशानी होती है। हर समय हादसों का डर रहता है। कस्बे के अंदर आने वाले मार्ग से मोड़ पर सड़क छोटी है।


लोगों का क्या है कहना


क्षेत्र के लोगों ने बताया कि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने पुराने मार्ग व पास अवाप्त भूमि को छोड़कर राजमार्ग से मिला दिया। खाली पड़ी जमीन किसी काम में नहीं आ रही है व अतिक्रमण पनप रहा है। एकाएक बनाए गए छोटे मोड़ से वाहनधारी परेशान हो रहे हैं। यह सर्कल दुर्घटना का केंद्र बन रहा है, यहां बीते दिनों में दर्जन भर से अधिक वाहनधारियों को चोट लगी है। वहीं, एक छात्रा समेत कई जानें गई हैं।


मांडल बाइपास से जुड़ी राहें


भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजमार्ग का निर्माण कराया व मांडल जाने वाले सड़क मार्ग को पेराफरी में आने से नगर विकास न्यास ने निर्माण कराया। एनएचएआई की निर्माण कार्य के दौरान भविष्य में वाहनों के दबाव की अनदेखी की गई है। इससे यह मांडल बाइपास अब परेशानी का सबब बनने लगा है।


छात्रा की हुई थी मौत


मांडल से आवागमन करने वाले वाहन चालकों के लिए सदैव खतरा बना रहता है। पूर्व में कई हादसे हो गए हैं। वाहन चालक हादसे का शिकार होकर अस्पताल की राह पकड़ चुके हैं। गत वर्ष परीक्षा देने जा रही महाविद्यालय की छात्रा की अकाल मौत हुई थी।


एक बार मांडल बाइपास चौराहा पर इंजीनियर को भेजा जाएगा, ताकि वह मौका निरीक्षण कर समस्या का पता लगाएगा। इसके बाद ही समस्या का समाधान संभव है।
-राकेश कुमार, परियोजना, निदेशक सड़क परिवहन मंत्रालय


मांडल बाइपास सर्कल पर कमी रह गई है। आए दिन हादसों को लेकर सरकार को प्रस्ताव बना कर भेजा जाएगा।
-उदयलाल भड़ाना, मांडल विधायक