भीलवाड़ा. 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, तब मेरी उम्र महज दस वर्ष थी। आजादी को लेकर हर तरफ उत्सवी माहौल था। लोग नारे लगा रहे थे। हम तब बचपन की मस्ती में थे, ज्यादा कुछ समझ नहीं थी, लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हमारी भी जुबां पर था। शहर में जब जश्न की रैली निकलती तो हम भी देश आजाद हो गया....., हमारा देश आजाद हो गया ......जोश के साथ चिल्लाने लगते थे। यह कहना है पुराना भीलवाड़ा निवासी 85 वर्षीय स्नेहलता धारीवाल का। आजादी के दिनों में अनुशासन सहित अन्य िस्थतियों का जिक्र करते हुए धारीवाल ने तत्कालीन समय की शिक्षा, अनुशासन, देश भक्ति सहित अन्य व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए देश को सोने की चिडि़या कहने के पीछे के कारणों को साझा किया।