सब्जी व प्लास्टिक का कूडा आ रहा काम
प्लांट मैनेजर राहुल बताते है कि अभी शहर की कॉलोनियों से रोजाना १३५ मैट्रिक टन से अधिक कचरा रोज यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड पर आ रहा है। सबसे पहले उनका यहां तोल होता है। इसके बाद कचरे की छंटाई होती है। सब्जी, नारियल, फल, व घर के कूडे को अलग किया जाता है। इसी प्रकार प्लास्टिक निर्मित कचरे यानि टयूब, टायर,पानी की बोतलें, बाल्टियां, पॉलिथीन व दूध थैलियां, पेपर को अलग किया जाता है। यहां स्थापित आधुनिक मशीनों के जरिए सब्जी युक्त कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है, जबकि आरडीएफ यानि रिफ्यूज ड्राई फ्यूल से कोल के वैकल्पिक रूप में सीमेंट प्लांट के लिए ताप निरोधक ईंटे बनाई जा रही है। किसानों के लिए खुले व पैकिंग में जैविक खाद की बिक्री भी शुरू की गई है। ताप निरोधक ईंटे चित्तौडग़ढ़ व निम्बाहेड़ा तक जाने लगी है।