8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दीक्षा समारोह के साक्षी बने बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज

महाश्रमण ने आर्षवाणी द्वारा प्रदान किया संयम पथ, प्रेक्षा बनी साध्वी रोहिणीप्रभा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Suresh Jain

•

Updated: 28 Oct 2021, 8:57 AM IST

दीक्षा समारोह के साक्षी बने बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज

दीक्षा समारोह के साक्षी बने बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज

भीलवाड़ा।
आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में भीलवाड़ा चतुर्मास के दौरान दूसरी बार जैन भगवती दीक्षा समारोह बुधवार को हुआ। इसमें आचार्य महाश्रमणजी ने आर्षवाणी के द्वारा मुमुक्षु प्रेक्षा संचेती को साध्वी दीक्षा प्रदान करते हुए साध्वी रोहिणीप्रभा के रूप में नव साधुत्व जीवन प्रदान कर आचारों की पूर्ण जागरूकता से पालन करने की प्रेरणा प्रदान की।
दीक्षा समारोह के साक्षी बने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व बिहार राज्य के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन। हुसैन न केवल इस समारोह के दर्शक बने, बल्कि आचार्य के समक्ष अपने श्रद्धासिक्त भावों को अभिव्यक्ति दी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुभकामना संदेश पत्र का वाचन कर उसे आचार्य को समर्पित किया। इस दौरान आचार्य की दो कृतियों के लोकार्पण भी किए।
जो स्वेच्छा से भोगों का त्याग करे, वह त्यागी
आचार्य ने कहा कि भारत में अनेक ऋषि, मुनि, संत हुए हैं। कईयों ने आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आत्म साक्षात्कार (केवलज्ञान) को प्राप्त किया। ऐसे दिव्य विभूतियों की आर्षवाणी ही शास्त्र बनती है। अगर कोई अभाव वश किसी प्रकार का भोग नहीं कर पाता तो वह त्यागी नहीं, बल्कि जो समस्त सुविधाओं से सम्पन्न होने व भोगों को भोगने की क्षमता रखने के बाद भी स्वेच्छा से उन भोगों का त्याग कर दे, वह त्यागी होता है।
आचार्य के प्रवचन के बाद मुमुक्षु राजुल ने दीक्षार्थी प्रेक्षा संचेती का परिचय दिया। पारमार्थिक शिक्षण संस्था के बजरंग जैन ने माता-पिता की ओर से लिखे गए आज्ञा पत्र का वाचन किया। जिसे मुमुक्षु प्रेक्षा के माता-पिता अरुण संचेती व माता ममता संचेती ने आचार्य को समर्पित किया। दीक्षार्थी प्रेक्षा संचेती ने अपनी भावपूर्ण भावाभिव्यक्तिदी।
साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने दीक्षा के महत्व का विवेचन किया। आचार्य ने एक बार पुन: दीक्षार्थी प्रेक्षा संचेती व उनके माता-पिता से आज्ञा लेने के बाद आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए सर्व सावद्य योगों का त्याग करा साध्वी दीक्षा प्रदान की। साध्वीप्रमुखा ने गुरुदेव के इंगित से केशलोच व रजोहरण प्रदान किया। आचार्य ने नवदीक्षित साध्वी का साध्वी रोहिणीप्रभा के रूप में नया नामकरण किया तो पूरा परिसर ओम अर्हम से गूंज उठा। नवदीक्षित साध्वी का श्रावक समाज ने वंदन किया। नवदीक्षित को अनुशासन का ओज आहार देते हुए अपने संयम पथ पर आगे बढऩे के लिए साध्वीप्रमुखा के संरक्षण में सौंपते हुए आचार का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करने की प्रेरणा प्रदान की।
जैन विश्व भारती की ओर से आचार्य के प्रवचनों पर आधारित दो नवीन कृति उठो शिष्य व भगवान ने कहा को बिहार के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन, जैन विश्वभारती के अमरचंद लूंकड़, अरविन्द संचेती व चांदरतन दूगड़ ने लोकार्पित की।
आचार्य के संदेशों की पूरे विश्व को जरूरत
इस दौरान शाहनवाज हुसैन ने कहा कि साल में एक बार अवश्य आचार्य महाश्रमण के दर्शनार्थ उपस्थित होता हूं। उन्होंने कहा कि आचार्य के संदेशों की जरूरत इस देश को नहीं, बल्कि पूरे विश्व को है। आपके द्वारा बताया गया मार्ग ही मानव को शांति के पथ पर ले जाएगा। आचार्य ने हुसैन को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि राजनीति भी सेवा का माध्यम है। इसमें नैतिकता, प्रमाणिकता बनी रहे, सद्भावना का प्रसार हो तो अच्छी सेवा हो सकती है। आचार्य व शाहनवाज के मध्य कुछ देर अलग से चर्चा भी हुई।