प्राचीन काल में यह नगर राजा धुंध की नगरी थी, जिसे ताम्बवती नगरी भी बोला जाता था। राजा धुन्ध जिनका किला खारी नदी के किनारे पर प्राचीन काल से बना हुआ था, वह आज भी विद्यमान है। कहा जाता है कि वे जगन्नाथपुरी में जगन्नाथजी के दर्शनार्थ गए थे। कोलकाता पहुंचे तो देवी मां ने सपने में कहा कि तुम यहीं से लौट जाओ। मैं तुम्हारे गांव में बालू रेत के टीले में दबी हुई हूं। टीले का स्थान भी बताया। लोगों का कहना है कि खुदाई करने पर 90 फीट ऊंची और 100 फीट चौड़े वर्गाकार टीले से रेत हटाते ही मां भगवती अपनी 7 बहिनों के साथ प्रकट हुईं। इनमें श्री अष्टभुजाजी, अन्नपूर्णाजी, चामुण्डाजी, महिषासुर मर्दिनी व श्री कालका जी हैं। इन पांचों मूर्तियों के दर्शन श्रृंगार होने पर होते हैं।
11वीं सदी का मंदिर